Tuesday, February 2, 2016

An excellent suggestion to reduce viewership of Dagal movie (1-feb-2016) No.1

February 1, 2016 No.1

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153264675676922

An excellent suggestion to reduce viewership of Dagal movie . The suggestion is from https://www.facebook.com/alia.das.357 , Dhrupad Gupta .
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We should make COMICS which has the plot of Dangal .
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And the comics should also describe what FALSEHOOD Dangal movie is trying to spread.
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Chances that a person who has read the comics will see Dangal are LESS. i.e. the comics can reduce the viewership of movie Dangal 
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Of course, best option is to make a clone movie with same plot / theme and release it before dec-2016. But we dont have money to make movie, and BJP / RSS leaders who have money, wont make it

प्रिय कार्यकर्ताओ , क्या आप इस आर्थिक कानूनी ड्राफ्ट से सहमत है ? यदि नहीं, तो इसमें आप क्या कमियां देखते है ? (28-Jan-2016) No.6

January 28, 2016 No.6

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153256866576922

प्रिय कार्यकर्ताओ , क्या आप इस आर्थिक कानूनी ड्राफ्ट से सहमत है ? यदि नहीं, तो इसमें आप क्या कमियां देखते है ?
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प्रस्ताव इस तरह है कि --- सभी कर हटा दियें जाएँ, और सभी प्रकार की सम्पत्तियों पर 5% (या अन्य कोई निश्चित दर ) संपत्ति कर लगा दिया जाए। इस सम्पत्ति कर की कोई सीमा (जैसे कि 2 करोड़ से अधिक) तय की जा सकती है। इस समान संपत्ति कर से सरकार अपने खर्चे निकाले और बची हुयी राशि का वितरण देश के सभी नागरिको में कर दिया जाए। दूसरे शब्दों में, इस प्रकार के संपत्ति कर का समान कराधान न सिर्फ सरकार को आमदनी देगा, बल्कि गरीबी को भी दूर करेगा।
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रोशन लाल अग्रवाल, भारत गांधी एवं अन्य द्वारा सुझाए गए 'नागरिक भत्ता' तथा 'इकोनोमिक जस्टिस फॉरम' शीर्षक के इस प्रस्ताव को यहां देखा जा सकता है ---https://web.facebook.com/votership ; 'आर्थिक न्याय मंच', 'भारतीय न्याय मंच' आदि जैसे कई संगठन इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे है।
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हमारे प्रस्ताव और उपरोक्त सुझाव में कुछ समानताएं है और कुछ भिन्नताएं। जहां तक खनिज, स्पेक्ट्रम और सरकारी जमीन का प्रश्न है, हम भी इनका किराया वसूल कर नागरिको के खाते में भेजने का समर्थन करते है। लेकिन 'निजी संपत्ति' के बारे में हमारा प्रस्ताव है की, इस मद से एकत्रित करो का उपयोग सिर्फ सरकार को अपने खर्चे निकालने में ही करना चाहिए, और हम निजी संपत्ति पर वसूले गए कर का वितरण नागरिको को करने का समर्थन नहीं करते। इसके अलावा हमारा यह भी मानना है कि, संपत्ति कर के सटीक संग्रहण के लिए आयकर लगाना आवश्यक है।
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कृपया इस बिंदु को नजर अंदाज करे कि, 'संपत्ति करो की पर्याप्त वसूली के लिए आयकर लगाना आवश्यक है'। क्योंकि यह एक तकनिकी विषय है। लेकिन जिस राजनैतिक बिंदु से हम असहमत है, वह यह है कि --- हम 'निजी संपत्ति' से वसूले गए संपत्ति कर का वितरण नागरिको में करने का समर्थन नहीं करते।
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इस स्थिति में हम रिकालिस्ट्स के सामने प्रश्न यह है कि -- गरीबी कम करने के लिए यदि निजी संपत्तियों पर कर लगा कर वसूले गए रूपयों का वितरण नागरिको में कर दिया जाता है तो इसमें 'गलत' क्या है ?
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कृपया इस प्रश्न का उत्तर देने की कोशिश करे। कृपया 'मौलिक अधिकार', 'प्राकृतिक अधिकार' आदि शब्दों का प्रयोग न करे। यदि आप अपना तर्क पूर्ण जवाब 'नैतिक अधिकार' आदि शब्दों का प्रयोग किये बिना रख सके तो और भी बेहतर होगा। कुल मिलाकर क्या आप इस प्रस्ताव के समर्थन या विरोध में कोई ठोस और भौतिक स्पष्टीकरण प्रस्तुत कर सकते है ?
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मेरा उत्तर
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इस प्रस्ताव का वह बिंदु जिस पर हम राईट टू रिकॉल ग्रुप के कार्यकर्ता सहमत है, वह यह है कि ---- हम खनिज/स्पेक्ट्रम/जल संसाधन की रॉयल्टी तथा सरकारी भूमि के किराए से प्राप्त आय को सभी नागरिको में बराबर वितरण का समर्थन करते है।
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लेकिन जब निजी स्वामित्व की जमीनो की बात आती है तो हमारा प्रस्ताव है कि उन पर लगाए गए संपत्ति कर से प्राप्त धन का इस्तेमाल सिर्फ सरकारी व्ययों को पर ही किया जाना चाहिए। हमने ऐसा कोई प्रस्ताव नही रखा है कि सम्पत्ति कर का वितरण नागरिको में किया जाए।
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हमारे विचार में यदि 'संपत्ति कर लगाकर वसूली गयी राशि को सभी नागरिको में बाँट दिया जाता है' तो निम्नलिखित दुष्परिणाम सामने आयंगे :
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1. मान लीजिये कि यह प्रस्ताव यदि भारत में आज लागू किया जाता है तो, संपत्ति कर की यह दर अमेरिका में लागू संपत्ति कर की दर से काफी ऊँची होगी। इस परिस्थिति में ऐसे व्यक्ति जो अपनी काबलियत से संपत्ति और धन कमा रहे है न कि प्राकृतिक संसाधनो पर अपने मालिकाना हक़ से, वे व्यक्ति भारत छोड़ कर अमेरिका में बस जाएंगे। उनके देश छोड़ने के साथ ही हम हथियारों, चिकित्सा उपकरणों, दवाईंयो आदि को बनाने में सक्षम इंजिनीयरो को खो देंगे, जिससे भारत और अमेरिका के बीच शक्ति अनुपात और भी बदतर हो जाएगा।
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2. अब कई लोगो का दावा है कि -- जब संपत्ति कर से वसूल किये गए रूपये का वितरण नागरिको में किये जाने की यह व्यवस्था भारत में लागू होगी तो, धीरे धीरे अमेरिका, ब्रिटेन समेत दुनिया के बाकी देशो में भी यह व्यवस्था लागू हो जायेगी।
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3. मान लीजिये कि दुनिया के शेष देशो में भी 'आर्थिक न्याय' के सिद्धांत को अपना लिया जाता है। ऐसी स्थिति में भारत के शीर्ष 1% धनिक किसी एक स्थान जैसे की गोवा में एकत्रित हो जाएंगे, और गोवा को अलग देश घोषित करने की मांग करेंगे। अब चूंकि गोआ में संपत्ति कर की दर नीची रहेगी और इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ सरकार चलाने के लिए किया जाएगा अत: देश और दुनिया के अन्य धनिक, जो कि अपनी योग्यता से पैसा कमाकर सम्पत्तियों का सृजन कर रहे है, वे सभी गोआ की और रूख करेंगे। अब क्योंकि इस मुट्ठी भर लोगो के पास ज्यादा सम्पदा और इंजीनियरिंग कौशल होगा अत: जल्दी गोआ में बेहतर आधुनिक हथियारों का उत्पादन करेगा जिससे उनकी ताकत बढ़ेगी और वे शेष भारत तथा विश्व को भी अपने नियंत्रण में लेकर उन्हें गुलाम बना लेंगे।
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3A. दूसरे शब्दों में, यदि दुनिया के सभी देश 'निजी संपत्ति पर कर लगाकर नागरिको में वितरण' के सिद्धांत को लागू कर देते है, तब भी उन 1% काबिल लोगो को अलग देश के निर्माण से नहीं रोका जा सकता जिनके पास इंजीनियरिंग/चिकित्सीय कौशल है। और इस छोटे देश में ज्यादा बेहतर इंजिनियर होने से ज्यादा बेहतर हथियार होंगे, अत: न सिर्फ ये अपने आपको ताकतवर बनाये रखेंगे बल्कि इनकी ताकत बढ़ने के साथ साथ ये अन्य देशो को नियंत्रित भी कर सकेंगे। इस्राएल इसका उदाहरण है, जो छोटा देश होने बावजूद अरब देशो पर काबू बनाये रखता है।
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4. इसलिए, यदि इंजीनियरिंग कौशल से युक्त ऐसे काबिल लोगो को भारत खो देता है तो यह भारत के शेष औसत नागरिको के लिए काफी नुकसानदेह साबित होगा।
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लेकिन पुलिस प्रशासन, न्यायालय और सेना को सुचारू रूप से चलाने के लिए सम्पत्ति कर आवश्यक है। यदि यह संपत्ति कर लागू नहीं किया जाता है तो धनिक वर्ग को शुरूआती लाभ होगा, लेकिन इस कर के अभाव में अपराधियों और दुश्मन देश की सैन्य ताकत बढ़ने से उन पर हमला होने की संभावनाए बढ़ जायेगी अत: दूसरे दौर में उन्हें काफी घाटा उठाना पड़ेगा। इसलिए चाहे धनिक वर्ग इस प्रस्ताव का समर्थन करे या विरोध लेकिन वे इस बात पर राजी अवश्य हो जाएंगे कि उन्हें सेना, पुलिस और अदालतों को सुचारू रखने के लिए भुगतान करना चाहिए। वे इस बात को समझेंगे कि सेना, पुलिस और अदालतों को सक्षम बनाने के लिए कौशल की आवश्यकता होती है, अत: बुनियादी शिक्षा के ढांचें को सुधारने में निवेश किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर धनिक संपत्ति कर की ऐसी सीमा को जरूर बर्दाश्त करेंगे जो उनके व्यवसाय को चलाने और बचाने के लिए खर्च करना आवश्यक है, लेकिन इससे ज्यादा दर वसूलने से वे या तो देश छोड़ देंगे या अलग देश की मांग करेंगे।
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इसलिए, मेरे विचार में निजी सम्पत्तियों पर कर लगाकर वसूली गयी राशि का वितरण नागरिको में करना व्यवहारिक प्रस्ताव नहीं है। 

A judicial commission had asked Kerala CM Oommen Chandy to take lie detector tests (28-Jan-2016) No.5

January 28, 2016 No.5

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153256911116922

A judicial commission had asked Kerala CM Oommen Chandy to take lie detector tests
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IOW, lie detector tests , such as polygraph, brain mapping and natcotest to have place in Indian legal system as of today
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But Subramanian Swamy , in 2G case, had refused to ask court to put A Raja, Manmohan Kaur, Soorpanakha Gandhi etc on narcotest !!!
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IOW, Subramanian Swamy was more interested in coverup , and not in digging facts out.
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http://indianexpress.com/…/solar-scam-case-kerala-court-or…/
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.... Nair’s allegations come a day after Chandy refused to undergo a lie-detector test while deposing before the judicial commission. ... 
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pls click link for full article
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राजीव भाई दीक्षित के लिए पद्म विभूषण अलंकरण (28-Jan-2016) No.4

January 28, 2016 No.4

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153256937041922

राजीव भाई दीक्षित के लिए पद्म विभूषण अलंकरण --- यह देखना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओ और संघ के स्वयंसेवको ने मोदी साहेब के सामने स्वर्गीय राजीव भाई दीक्षित को पद्म विभूषण से अलंकृत करने की मांग रखने से इंकार कर दिया। 
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हम रिकालिस्ट्स जल्दी ही इस सम्बन्ध में प्रधानमंत्री को एसएमएस द्वारा आदेश भेजना शुरू करेंगे तथा अन्य मतदाताओ से भी आग्रह करेंगे कि वे प्रधानमंत्री को आदेश भेजे कि राष्ट्रबंधु स्वर्गीय राजीव दीक्षित को पद्म विभूषण से अलंकृत किया जाए। 
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लेकिन यह बात ध्यान देने योग्य है कि --- अब तक एक भी संघ सेवक और भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ता ने अपने ट्विटर हेंडल से प्रधानमंत्री कार्यालय के सामने यह मांग नहीं रखी है कि राजीव भाई को पद्म विभूषण पुरस्कार दिया जाए। 
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और श्री मोहन भागवत ने तो आज तक उनका नाम भी नहीं लिया है, प्रशंषा करना तो दूर की बात है। 
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मोदी साहेब ने भी न तो आज तक राजीव भाई की प्रशंषा की न ही उनके भागीरथ कार्यो के लिए कभी उन्हें धन्यवाद कहा। 
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हालांकि राजीव भाई जैसी शख्शियत का रुतबा भारत रत्न का है, और उनकी हैसियत को किसी पुरस्कार की आवश्यकता नहीं। लेकिन इस समय उनके कार्यों के बारे में बहुत कम लोग परिचित है। लगभग 2 करोड़ नागरिको ने ही उनका नाम सुना होगा। इसलिए हम उनके लिए मौजूदा हालात में पद्म विभूषण की मांग कर सकते है। इससे उनके व्याख्यानों को ज्यादा लोग सुनेंगें और ज्यादा से ज्यादा नागरिको को उनके बारे में जानकारी मिलेगी। 

भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता भारत में पतंजलि के प्रोडक्ट बेचने के लिए वालमार्ट-इण्डिया के साथ व्यापारिक समझौता करने की कोशिश में है (28-Jan-2016) No.3

January 28, 2016 No.3


भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता भारत में पतंजलि के प्रोडक्ट बेचने के लिए वालमार्ट-इण्डिया के साथ व्यापारिक समझौता करने की कोशिश में है --- ताकि जितना ही पतंजलि के उत्पाद वालमार्ट के माध्यम से बिकेंगे, देश पर डॉलर चुकाने का कर्ज भी उसी अनुपात में बढ़ता जाएगा।
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पतंजलि और वालमार्ट के बीच समझौता यह हुआ है कि --- वालमार्ट पतंजलि का सामान बेचेगा, और इसकी एवज में भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता भारत के स्वदेशी कार्यकर्ताओ को भ्रमित करेंगे। 
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भारत में कोई भी पेशेवर कारोबारी यदि अपना सामान बेचने और मुनाफा बढ़ाने के लिए यदि वालमार्ट, मैक्डोनल्ड या पेप्सी कोक आदि की सहायता लेता है तो यह कारोबार के नजरिये से ठीक है और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। क्योंकि ऐसा करना कानूनी और व्यावसायिक मुनाफे के अनुकूल है, और व्यापार में फैसले लाभ को दृष्टिगत रखकर ही किये जाते है। 
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लेकिन ऐसा व्यक्ति जो खुद को एक 'कार्यकर्ता' और यहां तक कि 'स्वदेशी कार्यकर्ता' कहता है, लेकिन अपना स्वदेशी सामान बेचने के लिए एक विदेशी कंपनी से गठजोड़ बनांता है, तो ऐसा व्यक्ति 'कार्यकर्ता' नहीं है। वह बईमान धंधेबाज है, जो कि मुनाफ़ा कमाने के लिए झूठ बोल सकता है, धोखा दे सकता है और यदि उसे मौका मिले जहर की बोतल को अमृत कह कर भी बेच सकता है। 
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भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता भी इसी फितरत के 'कार्यकर्ता' है। 
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जब से राजीव भाई का अवसान हुआ है, तब से मैं सभी से आग्रह कर रहा हूँ कि भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकताओ को भाड़ में जाने दो और व्यवस्था परिवर्तन के लिए राईट टू रिकॉल कार्यकर्ताओ के साथ कार्य करो। मेने कई बार यह कहा है कि --- भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता राजीव भाई की तस्वीर को अपनी प्रोफाइल पर इसीलिए लगाते है ताकि वे स्वदेशी कार्यकताओ को बेवकूफ बना सके, असल में ये सभी रंगे सियार है। वरना भारत में सैंकड़ो हजारो कारोबारी है, जो खुद को कारोबारी कहते है और अपना कारोबार करते है। और इसमें कोई गलत बात भी नहीं। लेकिन 'स्वदेशी कार्यकर्ता' की खाल लपेट कर अपना कारोबार इस तरह से बढ़ाना जिससे देश को नुकसान हो, एक कार्यकर्ता की नीति नहीं हो सकती। ऐसे व्यक्ति धंधेबाज है, जो मुनाफे के लिए किसी हद तक गिर कर दिखा सकते है। 
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आज जब भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ता पतंजलि के प्रोडक्ट बेचने के लिए वालमार्ट से गठजोड़ बना रहे है !!
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तो मेरा कहना यह है कि --- हाँ, अगर आपको पैसा कमाना है तो आपको भारत स्वाभिमान ट्रस्ट से जुड़ जाना चाहिए। 
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लेकिन यदि आप भारत में व्याप्त समस्याओ के समाधान के लिए आवश्यक क़ानून देश में लागू करवाना चाहते है तो आपको भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओ के साथ अपना समय बर्बाद करने की जगह राईट टू रिकॉल कार्यकर्ताओ के साथ काम करना चाहिए। 
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सम्बंधित खबर के लिए यह लिंक देखें --- http://m.indiatvnews.com/…/walmart-in-talks-with-baba-ramde…
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BJP MP Hemamalini gets govt land worth Rs 40 crore for Rs 70000 (30-Jan-2016) No.8

January 30, 2016 No.8

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153260274676922

BJP MP Hemamalini gets govt land worth Rs 40 crore for Rs 70000
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Chances are high that NaMo had ordered Maharashtra CM fadanavis to give this Govt plot worth Rs 40 crore for ONLY Rs 70000 . to BJP MP Hemamalini , Lets see if the plot was given by BJP Govt or Congress govt.
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Hema Malini given 2,000 square metre plot in Oshiwara in Andheri for just Rs 70,000
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timesofindia.indiatimes.com/…/Hem…/articleshow/50767914.cms…
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Every RSS / BJP / BST worker , supports the land loot. And every NaMo-andhbhagat also supports this land loot.
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BJP MP Hemamalini says that she is making dance academy. And why does she want land for free? Because she is promoting Indian classical dances and she would be teaching poor slum kids for free !!!
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Congress leaders have specialized in looting in the name of secularizm.
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BJP leaders have specialized looting land in the name of protecting Indian culture, Indian nationalism etc etc
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AAP specializes looting land in the name of anti-corruption
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SOLUTION?
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1. The solution I propose is to make all land ownership records and all land sale deeds PUBLIC. This can be achieved by printing Right to Recall revenue Minister law-draft in Gazette, The law-draft is athttps://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10152319551996922
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2. MRCM --- law-draft that will ensure that commons are DIRECTLY getting the rent from the govt owned plots. When this law-draft comes, govt can only rent the land for 5 years to 50 years and not sell it. And rent will directly go in the account of citizens. So if govt gives land for lesser rent, then citizens will IMMIDIATELY know. And using RTR PM and RTR CM procedures , then force PM and CM to cancel such land deal. MRCM law-draft is athttps://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10152258841751922
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3. Appoint a Jury of 1500 to decide whether given land should be taken back or not, The Jury system DRAFT is athttps://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10152258909086922
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So what steps can YOU take TODAY to bring this solution?
.Please send all three above URLs to MPs via SMS as an order. And in separate SMS , pls send voter-id.
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Now Congress / AAP workers and SoGa \ ArGandhi oppose this specific land loot,. But they all shamelessly support land loots done by Congress / AAP . / SoGa / ArGandhi
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And now please note that EVERY Congress-worker, every BJP-worker, every AAP-worker, every RSS-worker, every BST-worker, every SoMoKe-andhbhagat has OPENLY opposed all the the proposed RTR / Jury law-drafts. So please do attend their meetings and see how they waste activists' time. And pls ask activists NOT to waste their time in their non-emergency social activities and slogan shouting.
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So, please send above three URL to MP via SMS as an order,

प्रियंका चोपड़ा और अजय देवगन को पदम् विभूषण देने का फैसला मोदी साहेब कि बीमार मानसिकता को दिखाता है (30-Jan-2016) No.7

January 30, 2016 No.7

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153260620351922

प्रियंका चोपड़ा और अजय देवगन को पदम् विभूषण देने का फैसला मोदी साहेब कि बीमार मानसिकता को दिखाता है। यह और भी शर्मनाक है कि प्रत्येक मोदी अंध भगत, संघ का प्रत्येक अंध सेवक, बीजेपी समर्थक, और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का प्रत्येक समर्थक मोदी साहेब के इस कुत्सित फैसले का समर्थन करके अपनी घृणित सोच का प्रदर्शन कर रहा है। 
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मोदी साहेब ने अजय देवगन और प्रियंका चोपड़ा को पद्म विभूषण से अलंकृत करने का आदेश सिर्फ इसीलिए दिया ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा अपने अकादमिक कैरियर को छोड़कर सिनेमा और मनोरंजन जगत कि और आकृष्ट हो। 
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यदि अगले साल मोदी साहेब सन्नी लियोनि को पद्म श्री देने कि घोषणा करते है तो यह उनके इस फैसले के अनुकूल ही होगा, और मोदी के अंध भगतो से इस सम्बन्ध में पूरी उम्मीद कि जा सकती है कि वे तब भी मोदी साहेब के इस फैसले को पूरा समर्थन देंगे। 
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पहली बात तो यह कि मैं प्रियंका चोपड़ा और अजय देवगन के खिलाफ नहीं हूँ, और न ही उनके द्वारा अभिनीत किये गए पात्रो और उनकी फिल्मो से मुझे कोई निजी विरोध है। भारत एक आजाद देश है। कोई भी अपनी जीविका चलाने और अपनी तरक्की के लिए किसी भी पेशे का आश्रय ले सकता है। वो जो भी भूमिकाएं करते है उसके बदले उन्हें पारिश्रमिक मिलता है, आय पर वे टेक्स चुकाते है और शेष का इस्तेमाल करते है। इसलिए कोई अपनी जीविका के लिए क्या करता है इस मामले में मेरा कोई दखल नहीं है। 
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परन्तु यदि किसी नागरिक को पद्म विभूषण दिया जाता है तो, नागरिको द्वारा इस सम्बन्ध में निर्णय किया जाना चाहिए। बाजार की ताकते अभिनेताओं, तारिकाओ, खिलाड़ियों आदि को प्रोत्साहित करती है ताकि जनता के बीच पेशे कि मांग को बरकरार रखा जा सके। लेकिन सरकारी इनामो-इकराम कुछ तय क्षेत्रो में प्रदर्शन के एवज में ही दिए जाने चाहिए। 
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प्रियंका चोपड़ा और अजय देवगन जैसे व्यक्तियों को इसे पुरस्कारों से नवाजने से देश का युवा वर्ग अपने अकादमिक कैरियर को छोड़कर मनोरंजन जगत में भाग्य आजमाने के लिए प्रेरित होगा, जो कि न तो छात्रों के भविष्य के लिए उचित है और न ही देश के लिए। 
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समाधान यह है कि ---
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1. ऐसे पुरस्कारो पर निर्णय लेने से पूर्व पुरस्कारों कि दौड़ में शामिल प्रतियोगियों के नामो कि सूची सार्वजनिक कि जानी चाहिए। ताकि नागरिक अपने सांसदों को एस एम एस द्वारा यह आदेश भेज सके कि किस प्रतियोगी को पुरस्कार नही दिया जाना चाहिए। 
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2. खेल, संगीत, फिल्मे, पत्रकारिता और मनोरंजन जगत जैसे शो बिजनेस को पुरस्कारों कि श्रेणी से बाहर रखा जाना चाहिए। ये पुरस्कार सिर्फ सैनिक, इंजिनियर, डॉक्टर, वैज्ञानिक तथा उन उद्योगपतियों को दिया जाना चाहिए जिन्होंने विशिष्ट बदलाव लाने में भूमिका निभायी। 
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चूंकि एक बार पुरस्कार देने के बाद उसे तब तक वापिस नहीं लिया जा सकता, जबकि यह साबित न हो जाए कि ऐसा पुरस्कार किसी राजनैतिक व्यक्ति को दिया गया हो अथवा उसमे राजनैतिक कारण मौजूद रहे हो। अत: मैं इन पुरस्कारों को वापिस लौटाने कि मांग नहीं करूँगा। 
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सभी कार्यकर्ताओं से यह आग्रह है कि वे इस बात पर ध्यान दें कि, किस तरह प्रत्येक मोदी अंध भगत, संघ का प्रत्येक अंध सेवक, बीजेपी समर्थक, और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट का प्रत्येक समर्थक मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन कर रहा है। जबकि वे सभी यह अच्छी तरह से जानते है कि इससे युवा वर्ग मनोरंजन जगत में अपना कैरियर बनाने के लिए प्रोत्साहित होगा, जो कि अपेक्षाकृत एक घटिया कैरियर है। 
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कार्यकर्ताओं को यह फैसला लेना चाहिए कि उनकी वरीयता क्या है। क्योंकि बीजेपी समर्थको को सिर्फ सत्ता में आने और टिके रहने की ही परवाह है चाहे इससे इनके नेता सत्ता में रहते देश को नुकसान पहुँचाने वाले फैसले ही क्यों न करें। ये तब भी हर हाल में अपने नेताओं को वोट देने की अपील करते रहेंगे। देश के हित से इन्हें कोई लेना देना नहीं है। 
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सोनिया घांडी और महात्मा अरविन्द केजरीवाल भी प्रियंका चोपड़ा और अजय देवगन को पद्म पुरस्कार दिए जाने का समर्थन कर रहे है। और प्रत्येक कोंग्रेस और आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता भी सोनिया-केजरीवाल के इस फैसले का समर्थन कर रहा है। लेकिन ये दोनों पार्टियाँ भारत-विरोधी है और यह बात किसी से छुपी हुयी भी नही है, अत: उनके द्वारा ऐसा करना उनकी निति के अनुकूल और प्रत्याशित है, और इस कारण इन दोनों पार्टियों पर दोगली निति का आरोप नही लगाया जा सकता। जो है सो है।
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इसलिए यदि आपका लक्ष्य भारत कि व्यवस्था को बेहतर बनाना है तो संघ/बीजेपी/बीएसटी और मोदी साहेब के अंध भगतो के साथ लगकर अपना समय बर्बाद करने से बेहतर है कि आप राईट टू रिकॉल कानूनों को देश में लागू करवाने के लिए अपनी उर्जा लगाए।