Monday, May 16, 2016

How to make FB links on FB posts free from triple dots and make FB links shorter? (14-May-2016) No.3

May 14, 2016 No.3

How to make FB links on FB posts free from triple dots and make FB links shorter?

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153483461586922

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When you post an FB link in an FB post, and if the link is long, then FB may replaces part of link by "...." . And such links becomes defunct when text is copy-pasted. So how we we get azadi from this triple dots in link?
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First NEVER use tinyurl. FB is hostile to tinyurls. So what is way out?
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(1) One solution is to place ENTER before and AFTER the link. In such case, FB may NOT shorten it and may not put triple dots,
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(2)And another method IMO you should always follow is --- shorten the link !!! So how can you shorten the link?
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(2a) replace www.facebook.com by fb.com eg
https://www.facebook.com/groups/righttorecallparty/10152114637883103/.
becomes
https://fb.com/­grou…/­righttorecallparty/­10152114637883103
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(2b) remove "/" at the end of the FB link. That makes it one character shorter
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(2c) You may also remove https:// . But I dont suggest it. Please use it ONLY as last resort. Because FB likes https:// links, and FB doesnt like http:// links, and FB also doesnt like links which dont have https:// https:// makes link less prone to virus attacks.
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(2d) shortening link to an FB notes --- This is important. Please remove username and also title of notes from the link of link to that FB notes. eg. consider link
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https://www.facebook.com/notes/rahul-chimanbhai-mehta-rrg/imp001-list-of-law-drafts-i-rahul-chimanbhai-mehta-voterid-ddv7231590-have-suppo/10152774660951922
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The username "rahul-chimanbhai-mehta-rrg" can be removed.
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And title portion "imp001-list-of-law-drafts-i-rahul-chimanbhai-mehta-voterid-ddv7231590-have-suppo" cam also be removed.
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So link becomes
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https://fb.com/notes/10152774660951922 !!!
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IMO, this should be sufficient
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And each time you shoretn the link, please check the link before you post.
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And whenever you have a link in FB post, please make sure to close link box before you click "post". !
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Happy FBCPBAing (FBCPBA = Facebook Cover Picture Based Activism).
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How to make FB links on FB posts free from triple dots and make FB links shorter? (14-May-2016) No.2

May 14, 2016 No.2

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153483461586922

How to make FB links on FB posts free from triple dots and make FB links shorter?
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When you post an FB link in an FB post, and if the link is long, then FB may replaces part of link by "...." . And such links becomes defunct when text is copy-pasted. So how we we get azadi from this triple dots in link?
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First NEVER use tinyurl. FB is hostile to tinyurls. So what is way out?
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(1) One solution is to place ENTER before and AFTER the link. In such case, FB may NOT shorten it and may not put triple dots,
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(2)And another method IMO you should always follow is --- shorten the link !!! So how can you shorten the link?
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(2a) replace www.facebook.com by fb.com eg
https://www.facebook.com/groups/righttorecallparty/10152114637883103/.
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https://fb.com/­grou…/­righttorecallparty/­10152114637883103
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(2b) remove "/" at the end of the FB link. That makes it one character shorter
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(2c) You may also remove https:// . But I dont suggest it. Please use it ONLY as last resort. Because FB likes https:// links, and FB doesnt like http:// links, and FB also doesnt like links which dont have https:// https:// makes link less prone to virus attacks.
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(2d) shortening link to an FB notes --- This is important. Please remove username and also title of notes from the link of link to that FB notes. eg. consider link
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https://www.facebook.com/notes/rahul-chimanbhai-mehta-rrg/imp001-list-of-law-drafts-i-rahul-chimanbhai-mehta-voterid-ddv7231590-have-suppo/10152774660951922
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The username "rahul-chimanbhai-mehta-rrg" can be removed.
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And title portion "imp001-list-of-law-drafts-i-rahul-chimanbhai-mehta-voterid-ddv7231590-have-suppo" cam also be removed.
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https://fb.com/notes/10152774660951922 !!!
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IMO, this should be sufficient
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And each time you shoretn the link, please check the link before you post.
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And whenever you have a link in FB post, please make sure to close link box before you click "post". !
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Happy FBCPBAing (FBCPBA = Facebook Cover Picture Based Activism).
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जमीनों के लेनदेन में काले धन की रोकथाम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट (14-May-2016) No.1

May 14, 2016 No.1

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153484338271922

जमीनों के लेनदेन में काले धन की रोकथाम के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
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भारत के नागरिको,
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पूरे देश में जमीनों की DLC/सर्कल रेट और वास्तविक कीमतों में बहुत बड़ा अंतर है जिससे जमीनों की खरीद फरोख्त में बड़े पैमाने पर नकदी या काले धन का इस्तेमाल किया जाता है । भ्रष्ट अधिकारियों, नेताओं और धनिको द्वारा अवैध रूप से कमाए धन का ज़्यादातर निवेश जमीनो में किया जा रहा है जिससे जमीनों की कीमते लगातार बढ़ रही है तथा सरकार को राजस्व का नुक्सान हो रहा है । जमीन की कीमतें बढ़ने से एक तरफ जहाँ आर्थिक दृष्टी से कमजोर वर्ग घर बनाने, उद्योग दुकान वगेरह लगाने में अक्षम हो जाता है, जिससे बेरोजगारी और गरीबी बढती है वहीँ दूसरी और भूमि निवेश में काले धन को प्रोत्साहन मिलता है ।
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इस समस्या के समाधान के लिए हमने निम्नलिखित कानूनी ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है।
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इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में प्रकाशित होने के बाद किसी भूखंड के विक्रय होने के 30 दिवस के भीतर कोई तीसरा पक्ष विक्रय मूल्य पर 25% अधिक भुगतान करके अमुक भूखंड का क्रय कर सकेगा, जिसमें से 20% राशि पूर्व पूर्व क्रेता प्राप्त करेगा । इससे जमीन के क्रय विक्रय में नकद लेनदेन में कमी आएगी तथा 3 वर्ष पश्चात मार्जिन को 25% से घटाकर 5 से 20% तक किया जा सकेगा ।
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स्पष्टीकरण के लिए दिए गए ड्राफ्ट का अनुच्छेद 3 देखें ।
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यदि आप इस क़ानून का समर्थन करते है तो अपने सांसद को एस.एम.एस. द्वारा ये आदेश भेजे :
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===== सांसद को भेजे जाने वाले SMS के नमूने का प्रारम्भ =====
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माननीय सांसद, मैं आदेश करता हूँ कि दिए गए लिंक में दर्ज कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित किया जाए : tinyurl. com/ReduceCashInLandDeals3
मतदाता संख्या : ######
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====== SMS के नमूने की समाप्ति ======
SMS नमूने का अंग्रेजी अनुवाद :
……
Dear MP, I order you to print the law draft mentioned in tinyurl. com/ReduceCashInLandDeals3
Voter ID : #######
……
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माननीय सांसद,
यदि आप निम्नांकित कानूनी ड्राफ्ट को गेजेट में प्रकाशित करने का सन्देश प्राप्त करते है तो इसे सन्देश भेजने वाले नागरिक मतदाता का आदेश माना जाए न कि लेखक का ।
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======= कानूनी ड्राफ्ट का प्रारम्भ ======
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सामान्य टिप्पणियां
यह टिप्पणियाँ ज्यूरी सदस्यों तथा अन्य सभी नागरिको के लिए गाइड लाइन की तरह है तथा ये कानूनी ड्राफ्ट के मूल भाग का अंश नही है ।
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इस क़ानून के अनुसार प्रवृत 'राष्ट्रीय भूमि विक्रय पर्यवेक्षण अधिकारी' (NLSSO) पदनाम से नियुक्त सरकारी अधिकारी किसी भूमि के विक्रय होने के 30 दिनों की अवधि के भीतर अमुक भूखंड की नीलामी आयोजित कर सकेगा । ऐसी नीलामी की राशि उस राशि से 25% अधिक होगी जिस राशि में क्रेता ने अमुक भूमि का क्रय किया है। यदि क्रेता ने किसी भूखंड के लिए वास्तविक बाजार मूल्य के अनुसार भुगतान किया है तो 30 दिनों की अवधि में स्वत: ही ऐसी नीलामी व्यवहार में नही आएगी । अत: वास्तविक बाजार मूल्य चुकाने वाले क्रेता इस क़ानून से अप्रभावित रहेंगे तथा क़ानून उन क्रेताओं पर लागू होगा जो कि वास्तविक बाजार मूल्य से कम मूल्य चुका रहे है । इस परिस्थिति में भी क्रेता को मौद्रिक नुकसान नहीं होगा किन्तु यदि क्रेता ने भूखंड का मूल्य वास्तविक बाजार मूल्य से कम दर्शाया है, तो उसे भूखंड का स्वामित्व खोना पड़ सकता है । इस प्रक्रिया को सेक्शन-3 में वर्णित किया गया है। अन्य सेक्शन सामान्य प्रक्रियाओं का उल्लेख करते है ।
यदि किसी भूखंड को वास्तविक बाजार मूल्य से कम कीमत पर क्रय किया जाता है तो NLSSO अमुक भूखंड की बोली लगाने के लिए अन्य पक्षकारो को सूचना देगा । ऐसी स्थिति में NLSSO अपना काम ईमानदारी और कुशलता से करे इसके लिए यह आवश्यक है कि NLSSO को प्रजा अधीन किया जाए । राईट टू रिकाल NLSSO की नियुक्ति और निलम्बन के प्रावधान सेक्शन RTR-NLSSO में दिए गए है ।
टिप्पणियों का समापन
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सेक्शन-1. सामान्य परिभाषाएं
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(1.1). इस ड्राफ्ट में नागरिक शब्द का अर्थ भारत का पंजीकृत मतदाता है ।
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(1.2). इस ड्राफ्ट में प्रयुक्त शब्द भूमि में सभी प्रकार के भूखंड, कृषि भूमि, फ्लेट्स, कार्यालय, निर्माण, इमारतें तथा किसी भूमि या फ्लेट पर निर्माण से प्राप्त स्वामित्व शामिल है ।
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(1.3). इस ड्राफ्ट में प्रयुक्त शब्द फ्लेट में सभी प्रकार के फ्लेट्स, बंगले, कार्यालय, अपार्टमेन्ट, इमारतें, गोदाम, औद्योगिक शेड्स सभी तरह के निर्माण तथा निर्माण से प्राप्त स्वामित्व शामिल है ।
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(1.4). यह अधिनियम उस भूमि के विक्रय पर लागू नहीं होगा, जिसका विक्रय निष्पक्ष तथा खुली नीलामी की प्रक्रिया के तहत किया गया हो । ऐसी कोई नीलामी प्रक्रिया निष्पक्ष एवं खुली हुयी है या नही, इसका निर्धारण इस अधिनियम में वर्णित ज्यूरी प्रावधानों के अनुसार नागरिको की ज्यूरी करेगी ।
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(1.5). शब्द विक्रय में सभी प्रकार के विक्रय, उपहार जो कि पारिवारिक सदस्यों के अलावा दिए गए है तथा किराया अनुबंध जो कि 20 वर्ष की अवधि से अधिक के हो, शामिल है । प्रवृत आयकर अधिनियम द्वारा निर्धारित घनिष्ठ पारिवारिक सदस्यों को दिए गए उपहार तथा विरासत विक्रय में शामिल नही है । यद्यपि किसी पारिवारिक सदस्य को दिए गए किसी उपहार को एक वर्ष के भीतर फिर से उपहार के रूप में प्राप्त करने को विक्रय की श्रेणी में माना जाएगा । यदि किसी कंपनी या ट्रस्ट के स्वामित्व वाले किसी भूखंड/फ्लेट का स्वामित्व किसी अन्य को हस्तांतरित किया जाता है, तो इसे विक्रय माना जाएगा ।
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सेक्शन-2. मुख्य अधिकारियों, उनके कार्मिक तथा कार्यालय
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(2.1). [ प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश ]
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भूमि क्रय-विक्रय में बैंक खाते रहित नकदी के प्रयोग में कमी लाने के लिए प्रधानमन्त्री राष्ट्रीय भूमि विक्रय पर्यवेक्षण अधिकारी (NLSSO) पद नाम से एक अधिकारी की नियुक्ति करेंगे, जिसे भारत के नागरिक इस अधिनियम में वर्णित RTR-NLSSO सेक्शन में दर्ज प्रावधानों के अनुसार बदल सकेंगे ।
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(2.2). [ NLSSO, प्रधानमन्त्री, सांसद तथा नागरिको के लिए निर्देश ]
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NLSSO गाइड लाइन जारी करेगा तथा पूरे देश में अपने कार्यालयों के संचालन के लिये आवश्यक कोष का ब्यौरा प्रस्तुत करेगा । ऐसी गाइड लाइन्स तब से प्रभावी होगी जबकि प्रधानमन्त्री इन्हें राजपत्र में प्रकाशित कर देते है, या सांसद इस प्रस्ताव को संसद में पारित कर देते है, या इसी अधिनियम में वर्णित टी सी पी सेक्शन में दर्ज प्रावधानों का प्रयोग करके भारत के नागरिक इन्हें अनुमोदित कर देते है ।
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(2.3). [ NLSSO के लिए निर्देश ]
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NLSSO केन्द्रीय तथा राज्य सरकारों में कार्यरत अधिकारियों की नियुक्ति उनके शीर्ष अधिकारियों की अनुमति से करेगा । NLSSO राज्यों में राज्य भूमि विक्रय पर्यवेक्षण अधिकारी (SLSSO), जिलो में जिला भूमि विक्रय पर्यवेक्षण अधिकारी (DLSSO), तथा तहसील स्तर पर तहसील भूमि विक्रय पर्यवेक्षण अधिकारी (TLSSO) की नियुक्ति करेगा । ये अधिकारी केंद्र सरकार के अधीन रहते हुए NLSSO के निर्देशन में कार्य करेंगे ।
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(2.4). [ NLSSO के लिए निर्देश ]
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NLSSO भूमि क्रय-विक्रय के पंजीयन तथा सम्बंधित गतिविविधियों के पारदर्शी संचालन हेतु SLSSO, DLSSO, TLSSO, भूमि क्रेताओं, भूमि विक्रेताओं आदि के लिये एक वेबसाईट निर्मित करेगा ।
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(2.5). [ NLSSO के लिए निर्देश ]
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NLSSO जारी किये गए आवश्यक दिशा निर्देशों के विज्ञापन जिलो के समाचार पत्रों में प्रकाशित करेगा । स्थानीय भाषा में यह विज्ञापन अमुक जिले के उन दो समाचार पत्रों में प्रकाशित किये जायेंगे जिनकी प्रसार संख्या प्रेस रजिस्ट्रार के अनुसार जिले में सर्वाधिक हो । A4 आकार के यह विज्ञापन मुख्य पृष्ठ के बाएं हिस्से में प्रकाशित किये जायेंगे जिनकी दरें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार होगी ।
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(2.6). [ NLSSO, सभी भूमि मालिको और नागरिको के लिए निर्देश ]
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इस सम्बन्ध में आवश्यक निर्देशों का विज्ञापन प्रकाशित होने के 90 दिनों के भीतर सभी व्यक्ति, साझेदार, अन्य कम्पनियां, सार्वजनिक उपक्रम, सरकारी इकाइयां, ट्रस्ट, सहकारी संस्थाएं, विदेशी व्यक्ति, इकाइयां तथा अन्य सभी नागरिक जो कि भारत में किसी भूमि या निर्माण में आंशिक या पूर्ण स्वामित्व रखते है, अपने स्वामित्व की सूचना का पंजीयन करायेंगे । यह पंजीयन TLSSO कार्यालय में दर्ज किया जा सकेगा । व्यक्ति या इकाइयां जिनकी हिस्सेदारी कोपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी या कोमर्सियल कोम्प्लेक्स में किसी भी प्रकार की हिस्सेदारी है, भी इस सम्बन्ध में स्वामित्व की सूचना का पंजीयन करायेंगे ।सभी नागरिक भूमि/फ्लेट आदि के स्वामित्व से सम्बंधित किये गए दावों की सूचना भी पंजीकृत करायेंगे, चाहे ऐसे दावों से सम्बंधित वाद अदालत में दायर नही किये गए हो अथवा नही । NLSSO नागरिको को यह सुविधा देगा कि वे अपने स्वामित्व और दावों से सम्बंधित विवरण इंटरनेट पर या TLSSO/वार्ड के कार्यालय में दर्ज कर सके। NLSSO किसी स्वामित्व/दावे के विलम्बित पंजीयन पर सम्बंधित भूमि के मूल्य का 0.03% जुर्माना साप्ताहिक आधार पर लागू कर सकेगा । दावों को विलम्ब से दर्ज कराने के आधार पर दावों की स्थिति अप्रभावित बनी रहेगी ।
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(2.7). [ NLSSO के लिए निर्देश ]
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NLSSO सभी भूमि स्वामित्व तथा दावों के अभिलेखों का विवरण स्वामी के नाम, छाया चित्र, पेन कार्ड संख्या, आधार कार्ड संख्या, मतदाता पहचान संख्या, माता-पिता के नाम, उनकी मतदाता पहचान संख्या, पेन कार्ड संख्या, आधार संख्या के साथ इंटरनेट पर पारदर्शी रूप से दर्ज करेगा । स्वामी के महिला होने की स्थिति में महिला का छाया चित्र प्रकाशित नही किया जाएगा, किन्तु महिला का द्वारा अनुमोदित उसके परिवार के किसी पुरुष सदस्य, या उसके द्वारा अनुमोदित अन्य पुरुष या उसके वकील का छाया चित्र वेबसाईट पर रखा जायेगा ।
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(2.8). [ NLSSO के लिए निर्देश ]
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NLSSO सरकारी संस्थाओं द्वारा उपयोग में लिए जा रहे सभी प्रकार के भूमि, फ्लेट, चाहरदीवारी जैसे जिलाधीश कार्यालय, नगर परिषद आदि के अभिलेख और विवरण रखेगा ।
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(2.9). [ सभी भू स्वामियों और TLSSO के लिए निर्देश ]
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जब भी कोई विक्रेता किसी भूमि/फ्लेट को बेचेगा, इस सूचना का पंजीयन TLSSO कार्यालय में कराया जाएगा । इसका विवरण क्रेता तथा विक्रेता दोनों को अलग से कार्यालय में प्रस्तुत करना होगा । दोनों पक्ष किसी भूखंड/फ्लेट की खरीद फरोख्त होने के 7 दिवस के भीतर अमुक भूखंड का नंबर, स्थिति, आकार, निर्माण का आकार, दोनों पक्षों के नाम, पहचान पत्र संख्या तथा भुगतान की गयी राशि का विवरण TLSSO कार्यालय में या उसकी वेबसाईट पर दर्ज करायेंगे । यदि ऐसे विवरण विलम्ब से प्रस्तुत किये जाते है तो अमुक भूखंड के मूल्य का 0.01% प्रतिदिन की दर से जुर्माना देय होगा ।
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(2.10). [ TLSSO के लिए निर्देश ]
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जब भी TLSSO को ऐसे किसी भूखंड के विक्रय की जानकारी होगी, वह अमुक भूखंड से सम्बंधित सम्पूर्ण विवरण जैसे भूखंड का नाम, संख्या, भूखंड का छाया चित्र, स्थिति, नक्शा, मूल्य, निर्माण की स्थिति, निर्माण का आकार, क्रेता तथा विक्रेता के नाम, उनकी पहचान पत्र संख्या, छाया चित्र ( यदि पक्षकार पुरुष है तो ) आदि वेबसाईट पर दर्ज करेगा । पक्षकार के महिला होने की स्थिति में महिला के छाया चित्र के स्थान पर अमुक महिला द्वारा अनुमोदित पुरुष या उसके वकील का छाया चित्र रखा जाएगा । यदि क्रेता कोई ट्रस्ट या कम्पनी है तो TLSSO सभी ट्रस्टियों के नाम तथा पहचान पत्र संख्या वेबसाईट पर रखेगा । ऐसी स्थिति में जबकि क्रेता कोई पब्लिक लिमिटेड कम्पनी है कंपनी का नाम, निदेशक मंडल तथा मुख्य अंश धारको के विवरण दर्ज किये जायेंगे न कि सभी शेयर धारको के ।
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सेक्शन-3. तृतीय पक्षकारो के लिए नीलामी प्रक्रिया ।
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(3.1). [ NLSSO के लिए निर्देश ]
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NLSSO विक्रय किये गए किसी भूखंड/फ्लेट आदि की नीलामी प्रक्रिया का संचालन करेगा । यह प्रक्रियाएं NLSSO द्वारा प्रकाशित किये गए विज्ञापन के 90 दिनों बाद प्रभावी होंगी । विज्ञापन से सम्बंधित प्रावधान अन्य अनुच्छेद में दिए गए है ।NLSSO पुराने विक्रय अनुबंधो को नीलामी प्रक्रिया में शामिल नही करेगा । NLSSO 20 वर्ष से अधिक अवधि के किराए अनुबंधो को शामिल करेगा, किन्तु 20 वर्ष या 20 वर्ष से कम समयावधि के किराए अनुबंधो को नीलामी प्रक्रिया में शामिल नही करेगा । NLSSO सिर्फ उन विक्रय व्यवहारों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल करेगा जिनमे दोनो पक्षकार निजी इकाइयां हो न कि कोई सरकारी इकाई । यहाँ सरकारी इकाई से आशय कोई भी ऐसी कम्पनी/इकाई से है जिसके स्वामित्व का 51% या इससे अधिक अंश केंद्र, राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम, स्थानीय निकाय, नगर परिषद् आदि के अधिकार में हो । NLSSO उन विक्रय व्यवहारों को भी नीलामी प्रक्रिया में शामिल नही करेगा, जिनके विक्रय में खुली तथा निष्पक्ष नीलामी प्रक्रिया का पालन किया गया हो । नीलामी की ऐसी कोई प्रक्रिया निष्पक्ष तथा खुली है या नही, इसका निर्धारण जूरी सदस्य करेंगे । जूरी प्रक्रिया से सम्बंधित प्रावधान इसी अधिनियम के ज्यूरी सेक्शन में दिए गए है ।
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(3.2). [ TLSSO के लिए निर्देश ]
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जब किसी भूमि/फ्लेट की बिक्री के बारे में TLSSO को जानकारी प्राप्त होगी, TLSSO अमुक भूमि/फ्लेट से सम्बंधित विवरण जैसे भूखंड का नाम, स्थिति, आकार, निर्माण की स्थिति, भूखंड का छाया चित्र, नक्शा, भूखंड की पहचान संख्या तथा भूखंड के मूल्य को वेबसाईट पर दर्ज करेगा ।
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(3.3). [ NLSSO, SLSSO, DLSSO तथा TLSSO के लिए निर्देश ]
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NLSSO आदि प्रयास करेंगे की नीलामी प्रक्रिया में तृतीय पक्ष द्वारा लगाई जाने वाली बोली की न्यूनतम राशि उस राशि से 25% अधिक हो जिस राशि का भुगतान क्रेता ने अमुक भूखंड को क्रय करने के लिए किया है । यदि कोई तृतीय पक्ष 30 दिनों के भीतर किसी भूखंड के विक्रय मूल्य से 25% अधिक भुगतान करता है, तो NLSSO क्रेता को 120% का भुगतान करेगा तथा तृतीय पक्ष को अमुक भूखंड के अगले संभावित स्वामी के रूप में दर्ज करेगा । संभावित स्वामी द्वारा लगाईं गयी इस राशि को स्वीकार करने के बाद NLSSO फिर से अगले 30 दिनों तक अगली बोली की प्रतीक्षा करेगा । यदि अन्य कोई पक्षकार इस भूखंड के लिए बोली लगाता है, तो यह बोली उस राशि से 25% अधिक होनी चाहिए जिस राशि का भुगतान संभावित स्वामी द्वारा पिछली खरीद में किया गया था । यदि अन्य कोई पक्ष अमुक भूखंड के लिए कोई बोली नही लगाता है, तो अंतिम क्रेता को भूखंड का स्वामी घोषित कर दिया जाएगा ।
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स्पष्टीकरण : 1
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अ) माना कि A एक भूखंड B को विक्रय करता है तथा B इसका मूल्य 1 करोड़ चुकाता है । A TLSSO को रिपोर्ट करता है कि उसने B को भूखंड 1 करोड़ में विक्रय किया है ।
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ब) माना कि 30 दिनों के भीतर C इस भूखंड को खरीदने के लिए 1.25 करोड़ रू का भुगतान करने का प्रस्ताव करता है । ऐसी स्थिति में TLSSO 1.20 करोड़ रू B के बेंक खाते में जमा करेगा तथा B का दावा अमुक भूखंड से हटा देगा । शेष 5 लाख रू की राशि केंद्र सरकार के खाते में जमा की जायेगी ।
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स) माना कि A के भूखंड बेचने के 30 दिनों के भीतर यदि C1, C2, तथा C3 क्रमश: 1.25 करोड़, 1.35 करोड़ तथा 1.50 करोड़ रूपये के भुगतान का प्रस्ताव करते है, तो TLSSO C3 के प्रस्ताव को स्वीकार करेगा, B का नाम भूखंड के स्वामित्व से हटाएगा, B को 1.20 करोड़ रू का भुगतान करेगा तथा शेष 30 लाख रू केंद्र सरकार के खाते में जमा करेगा ।
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द) जब एक बार C (या C3) का दावा भूखंड पर स्वीकार कर लिया जाता है, तो TLSSO नये दावों के लिए फिर से अगले 30 दिनों तक प्रतीक्षा करेगा । इस चरण में बोली की राशि पिछली बार अदा किये गए विक्रय मूल्य के 25% से अधिक होगी । यदि C ने भूखंड को 1.25 करोड़ में क्रय किया था अत: बोली लगाने के लिए अब यह राशि 1.25×125% = 1.56 करोड़ होगी ।
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य) ऐसी स्थिति में यदि D इस भूखंड को खरीदने का प्रस्ताव करता है तो बोली 1.56 करोड़ रू से प्रारम्भ होगी । यदि D 1.60 करोड़ की बोली लगाता है, तो TLSSO 1.50 करोड़ रू C के खाते में जमा करेगा, D का नाम भूखंड के संभावित स्वामी के रूप में दर्ज करेगा तथा अगले 30 दिनों तक प्रतीक्षा करेगा ।
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र) यदि अगले 30 दिन तक अन्य कोई भी पक्षकार बोली लगाने के लिए नही आता है, तो TLSSO भूखंड को अंतिम क्रेता के नाम पर हस्तांतरित कर देगा ।
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सेक्शन -4. भूमि के क्रय-विक्रय तथा नीलामी प्रक्रिया के विवादों के निपटान के लिए जूरी ट्रायल प्रावधान :
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(4.1). [NLSSO, भूमि स्वामियों तथा सभी नागरिको के लिए निर्देश]
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यदि NLSSO, SLSSO, DLSSO, TLSSO या उसके अधिकारियों और भूमि मालिको के मध्य किसी भूमि के क्रय-विक्रय या भूमि दावों के सम्बन्ध में कोई विवाद खड़ा होता है, तो NLSSO नागरिको की ज्यूरी का गठन करेगा । यह सेक्शन ज्यूरी के गठन के विनियमों से सम्बंधित है ।
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(4.2). [NLSSO के लिए निर्देश]
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NLSSO प्रत्येक जिले में एक जिला ज्यूरी प्रशासक, प्रत्येक राज्य में एक राज्य ज्यूरी प्रशासक तथा राष्ट्रीय स्तर पर एक राष्ट्रीय ज्यूरी प्रशासक की नियुक्तियां करेगा ।
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(4.3). [राष्ट्रीय ज्यूरी प्रशासक, राज्य ज्यूरी प्रशासक, जिला ज्यूरी प्रशासक, NLSSO और उसके स्टाफ, भू स्वामियों और नागरिको के लिए निर्देश]
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(4.3.1) किसी भूमि के क्रय विक्रय, दावों या नीलामी की प्रक्रिया को लेकर NLSSO तथा उसके स्टाफ और भू स्वामी एवं दावेदारो के बीच किसी प्रकार का विवाद होने पर मामला उस जिले में दर्ज किया जाएगा जिस जिले में विवादित भूखंड स्थित है ।
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(4.3.2). ज्यूरी के गठन के लिए जिला ज्यूरी प्रशासक जिले की मतदाता सूची में से अक्रमत: विधि से 30 से 55 आयु वर्ग के नागरिको का चयन करेगा । किन्तु ऐसे नागरिक पिछले 10 वर्ष में किसी ज्यूरी सभा के सदस्य न रहे हो, तथा न ही उन्हें किसी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो ।
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(4.3.3) यदि विवादित भूमि की राशि 25 करोड़ से अधिक है तो जूरी सदस्यों का चयन राज्य की मतदाता सूची में से तथा मूल्य 100 करोड़ से अधिक होने पर देश की मतदाता सूची में से किया जाएगा ।
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(4.3.4). ज्यूरी सदस्यों की संख्या : किसी ज्यूरी के लिए ज्यूरी सदस्यों की न्यूनतम संख्या 12 तथा अधिकतम संख्या 1500 तक हो सकेगी । यदि विवादित भूमि का मूल्य 50 लाख से कम है तो ज्यूरी सदस्यों की संख्या 12 होगी तथा भूमि का मूल्य 50 लाख से अधिक होने पर प्रति 50 लाख पर एक ज्यूरी सदस्य बढ़ा दिया जाएगा, किन्तु यह संख्या 1500 से अधिक नही बढाई जा सकेगी ।
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(4.3.5). राज्य या देश की मतदाता सूची में से ज्यूरी सदस्यों का चयन करने की दशा में चयन उन जिलों से किया जाएगा, जिन जिलो के जिला न्यायलय वीडियो कोंफ्रेंसिंग के जरिये उस जिले के न्यायलय से जुड़े हुए है, जिस जिले में सुनवाई की जा रही है । यदि मामला ऐसे जिले में दर्ज किया गया है, जिसके न्यायलय में वीडियो कोंफ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध नही है, तो सभी ज्यूरी सदस्यों का चयन उसी जिले की मतदाता सूची में से किया जाएगा ।
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(4.3.6) वर्तमान सर्कल रेट और पिछले विक्रय मूल्य में से जो भी अधिक हो उसे विवादित भूमि का प्राथमिक मूल्य माना जाएगा ।
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(4.3.7). ज्यूरी मंडल द्वारा दिए गए फैसलों के विरुद्ध अपील प्रवृत कानूनों के अनुसार उच्च न्यायलय, उच्चतम न्यायलय या ज्यूरी मंडल के समक्ष की जा सकेगी ।
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सेक्शन -5. RTR-NLSSO, राष्ट्रीय भूमि विक्रय पर्यवेक्षण अधिकारी के लिए राईट टू रिकाल प्रक्रिया :
(5.1) [केबिनेट सचिव, केंद्र सरकार या उनके द्वारा नियुक्त किये गए अधिकारी के लिए निर्देश]
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यदि कोई नागरिक मतदाता NLSSO बनना चाहता है तो वह केबिनेट सचिव के समक्ष उपस्थित होकर या अपने वकील के माध्यम से शपथपत्र प्रस्तुत करेगा । केबिनेट सचिव सांसद के चुनाव के लिए निर्धारित राशि के बराबर राशि जमा कर ऐसे शपथपत्र को दर्ज कर लेगा ।
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(5.2) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
यदि किसी जिले का मतदाता पटवारी कार्यालय में अपने मतदाता पहचान पत्र के साथ उपस्थित होकर NLSSO के लिए अनुमोदन दर्ज कराता है, तो पटवारी 3 रू शुल्क लेकर उसे कम्पूटर में दर्ज करेगा तथा बदले में एक रसीद देगा, जिस पर उसकी मतदाता पहचान संख्या, अनुमोदित उम्मीदवारों के नाम, समय तथा दिनांक अंकित करेगा । मतदाता अधिक से अधिक पांच उम्मीदवारों को अनुमोदित कर सकेगा ।
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(5.3) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
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पटवारी नागरिक द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकता के अनुसार उम्मीदवारों के अनुमोदनों को प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर उसकी मतदाता संख्या के साथ दर्ज करेगा ।
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(5.4) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
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यदि कोई मतदाता अपने किसी अनुमोदन को रद्द करवाता है तो पटवारी बिना कोई शुल्क लिए उसे रद्द कर देगा, तथा इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर दर्ज करेगा ।
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(5.5) [केबिनेट सचिव के लिए निर्देश]
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पिछले महीने के अंतिम दिन तक उम्मीदवारों को प्राप्त नागरिको के अनुमोदनों की संख्या को केबिनेट सचिव हर महीने की 5 तारीख को प्रकाशित करेगा ।
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(5.6) [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
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यदि किसी उम्मीदवार को कुल मतदाताओं के 51% अनुमोदन प्राप्त हो जाते है, ( कुल पंजीकृत मतदाताओं के 51%, न कि उन मतदाताओं के जिन्होंने अनुमोदन किया है ) तो प्रधानमन्त्री उसे NLSSO के पद पर नियुक्त कर सकते है या उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता नही है अथवा प्रधानमन्त्री अपने पद से इस्तीफा दे सकते है या उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता नही है । इस सम्बन्ध में प्रधानमन्त्री का फैसला अंतिम होगा ।
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सेक्शन -6. टी सी पी - जनता की आवाज के प्रावधान :
(6.1) [जिला कलेक्टर के लिए निर्देश]
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यदि कोई नागरिक मतदाता इस क़ानून में कोई संशोधन करना चाहता है तो वह कलेक्टर कार्यालय में उपस्थित होकर शपथपत्र प्रस्तुत कर सकेगा । कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर इसे प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर दर्ज करेगा और बदले में छपी हुयी रसीद देगा ।
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(6.2) [पटवारी/तलाटी के लिए निर्देश]
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यदि कोई मतदाता इस अधिनियम के किसी सेक्शन, अनुच्छेद या धारा में संशोधन चाहता है या टी सी पी की धारा एक के तहत दर्ज किये गए किसी शपथपत्र पर अपनी हाँ या ना दर्ज कराता है, तो पटवारी 3 रू लेकर उसे दर्ज करेगा तथा प्रधानमन्त्री की वेबसाईट पर डाल देगा ।
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(6.3) [प्रधानमन्त्री के लिए निर्देश]
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यदि किसी शपथपत्र पर कुल मतदाताओं के 51% मतदाता हाँ दर्ज कर देते है, तो प्रधानमन्त्री ऐसे शपथपत्र पर कार्यवाही कर सकते है, या इस्तीफा दे सकते या उन्हें ऐसा करने की जरुरत नही है । प्रधानमन्त्री का फैसला अंतिम होगा ।
=====ड्राफ्ट की समाप्ति===
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Sunday, May 15, 2016

I request all activists and all voters of India to make a public facebook group which has list of all law-drafts that YOU support. (15-May-2016) No.4

May 15, 2016 No.4

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153485554496922



I request all activists and all voters of India to make a public facebook group which has list of all law-drafts that YOU support.
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Each time you see a status post to the law-draft please copy/share that in THIS group. And please put the LINK to your post in this group as comment in the pinned status.
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When you share a law-draft on YOU wall, that post will get buried in 10s of post you will write next week, So say you support 100 law-drafts and have 5000 posts on FB. Then a person who visits your profile will NOT be able to see the 100 IMPORTANT posts as they are scattered between 5000 other posts !!
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SOLUTIONS?
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Solution I propose is that each activist / voter in India can create a facebook group in which he shares ONLY those posts which are law-drafts he supports. And put link to that group.can be put in the FB cover picture !!!
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So a person has to share the law-draft on his wall, and also in his own FB group which has title "Law-drafts I support" !!! WHY BOTH?
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Another solution I had proposed first is that --- each activist / voter on FB can create a FB notes, on which he can put links of the law-drafts status he supports. This option is BETTER than this group option, but more cumbersome as the user to copy-paste the links etc, It is better option, because by seeing one FB notes , information on ALL law-drafts he supports can be gained and tabulated, But since it imnvolves copy-pasting links, it is cumbersome and many may not do it. So this option of keeping ONE GROUP PER ACTIVIST / VOTER has value.
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Why is corruption rising and rising in China? And solution? (15-May-2016) No.3

May 15, 2016 No.3

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153485699466922

Why is corruption rising and rising in China? And solution?
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In order to increase speed of industry/business approvals, to compete against USA, Chinese apex leaders had no option but to give more and more discretionary powers to grant industry / business approvals to lower /. middle officers.
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And at the same time, Chinese-apex-leaders opposed law-drafts like JurySys / RTR / referendum to control lower / middle officers. So lower / middle officers became more and more corrupt. Due to increased corruption, their decisions are becoming more and more pro-business-owner, pro-factory-owner and anti-labor , anti-employee. So unrest in employees and labor will rise. And surplus income labor and employees can earn will fall. And so their ability to improve their skills and start their own business will fall.
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Also, whenever an employee starts his own business / factory, it is very common for his ex-employer to file a case against him accusing of stealing copyrights, stealing employees, stealing vendor list, stealing customer list and so on. In such cases, if the judges are corrupt, then decisions will be always pro-ex-employer and so new businesses / new factories wont come !!! . And so salary growth in labor and innovations. After all, salary rise and innovations comes due to NEW EMPLOYERS and not much due to incumbent. The incumbent do give raise in salary and also innovate, but mostly because of FORCE from new players.
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( ASIDE ---- Let me also give some general background, which apply to all countries and not just China.
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To regulate factory owners and businessmen, the middle / lower officers need some DISCRETIONARY powers to prosecute them, and also give them approval. How to ensure that middle / lower officers dont become corrupt? The methods are --- supervision from top, recruitment by written exams, transfers, Jury System, Right to Recall and so on. Chinese leaders opposed RTR, JurySys and referendum , except say town corporators. And they confined to supervision from top., transfers and recruitment by written exams.
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The supervision from top slows down the speed of middle and bottom. They end up waiting for orders from top. .
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Now Chinese leaders in order to compete against against USA, saw that they need to increase rate at which approvals are given by bottom / middle. And so Chinese leaders starting year 2000 started increasing powers of middle and lower officers. But Chinese leaders opposed RTR , Jury and referendum systems.
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US system gives wide powers to lower / middle officers. But JurySys, multi-elections, RTR and referendum ensures a minimal misuse of their powers. So even though offices in USA are far more powerful, then officers in China, they are much less corrupt.
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Now please read the whole status post once again.
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Now lets come back to China).
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So as labor's personal growth reduces in China, the frustration in them will rise, This will become a gold mine for Missionaries !!! So very soon, we will see more and more Missionary business in China.
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All in all, to complete against USA, Chinese leaders increase powers of middle / lower officers and didnt print law-drafts like JurySys , RTR , multi-election and referendum to control them. So middle / lower officers have become extremely corrupt, pro-rich and anti-poor.
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So China is doomed, and all towards grand defeat from USA.
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SOLUTION?
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Well, China is is still far far less bad than India in every respect. While I wrote about rising corruption in China, please note that it is more compared USA, not compared to India !! Compared to India, China is still lot less corrupt , though advancing.
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So IMO, we should focus and confine to solving problems of India. Given the mess we have, us giving advises to China will only be a joke on us.

About NGOs who work to improve India, but have no activity list to protect India !!! (15-May-2016) No.2

May 15, 2016 No.2

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153485732766922

About NGOs who work to improve India, but have no activity list to protect India !!!
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I come across several NGOs who work in in education, health, upliftment of women / dalit / children etc. I support their activists but oppose the tax exemptions and govt grants they get, And the tax exemptions and govt grants they get seem to be very dear to them, because they are very adamant on keeping tax exemptions and govt grants !!!
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That aside, I often ask then two question --- (q1) fine , you have activity list to improve India. But what activities do you propose to PROTECT India from USUK ?" (q2) what actions do they propose to reduce gap between USUK and India? .
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Because IMO if India / USUK strength ration keeps decreasing , then a 1750 AD like domination is imminent and unavoidable.
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These two questions gives them a shock.
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IMO, most NGO-men have assumed that India / USUK strength ratio is a useless parameter !! In their whole life, they never thought that rising and rising and rising strength of USUK. In their opinions, USUK will never try to dominate India no matter how much low ratio of strengths of India to USUK falls. And in their opinions, India is strong enough to deter USUK from doing Iraq on India or doing Libya on India.
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My point is --- all activity lists which improve India, but do NOT improve India / USUK strength ratio are USELESS compared to activity items which do BOTH hings (a) improve India (b) protect India by increase strength of India and also India / USUK strength ratios.
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Here, at least RSS / BJP activists differ --- they do admit that India is facing Military threat from USUK. But then solution they offer is --- worship NaMo and do NOTHING but worshiping NaMo !!! As if NaMo is some superman who can defeat all armies on his own !!! Then they admit that NaMo will print good law-drafts to improve India. And which law-drafts? The answer is "have faith in NaMo, and do NOTHING except praising NaMo" !! At this point, BJP / RSS workers start talking like Congress / AAP workers !!! In any case, BJP / RSS workers at less bad on THIS SPECIFIC issue,, than Congress / AAP workers. They admit the USUK threat.
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All in all, most NGOs etc have ONLY activity lists which can improve India, not protect India. Also improvement they propose will be so slow that gap between India and USUK will keep rising and rising. So please dont waste time on NGOs etc. Instead please work to publicize Right to recall Party law-drafts such as RTR, Jury System, MRCM, TCP, wealth tax , publicizing land ownership information of today, publish land deals from 1-jan-1900 till today and so on !!!

Why are judges in China quitting jobs , while in India, you rarely see Magistrates or seniors judges resigning? (15-May-2016) No.1

May 15, 2016 No.1

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153485965701922

Why are judges in China quitting jobs , while in India, you rarely see Magistrates or seniors judges resigning?
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http://blogs.wsj.com/…/what-a-stubborn-exodus-of-judges-me…/
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Of the over 2,000 judges recruited in Beijing in 2008-2012, almost 17% left their jobs, primarily in the lower courts, according to the Economic Observer story. Experienced judges are also quitting, and judges in Jiangsu and Henan Province, in particular those under 40, are increasingly resigning.
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In China, there are about 200,000 judges. Some 180,000 are junior judges (first hearing) and rest are appeals and higher level judges. , India has 20000 judges. So pie per judge in China is smaller.
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And all land belongs to Govt and so land cases dont come to court. Tax laws are simple, and so tax cases are also few (now that china has GST, tax disputes are rising).. So average pie per judge in China is much much lesser than in India.
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China has so called Assessor System and is also introducing Jury System. The judge has to preside along with 2 Assessor , And verdioct is given by majority. The Assessors can be govt servants or even ex-govt servants (except they can be soldiers who have retired over 10 years ago).They also can be at any seniorn position in any political party (mere membership is allowed). Their term is mere 1 year and they are NOT repeated. So there are about 180,000 junior judges and there are 2 Assessors per judge. so we have 360,000 assessors coming and going out every year. So nexus building isnt possible at large scale.
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The assessors dont have nexuses with lawyers , elitemen etc., So they are LESS prone to bribery and favoritism.
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So now a lawyer who has nexus with judge will see that he cant bribe at least one of the two assessors, then there is no point in giving bribe to the judge !!!
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So all in all, assessor system has reduced corruption in chinese courts. And so judges are quitting.
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Whereas quitting ratio in Chinese govt and chinese police and chinese communist party is low. because these three depts dont have any such democratic inputs. And so corruption is high.
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Now why not just raise salary of the judges? Well, judges were treated at par with officers of same rank, The officers in China get huge bribes, but judges get less bribes. But this factor cant be taken as official factor and so judges were getting same salary as officers of same rank. And so judges quit, The Chinese Govt may now be forced to raise salaries of judges.
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So all in all, forget having 12 to 1500 Jurors, even 2 assessors with one year term reduce corruption to such low level, that as many as 15% judges in China, who became judges between year 2000 and 2008 left !!
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So solution to Indian courts' mess is trivial --- expel ALL existing judges, bring new judges by written exam ONLY, make all apex judges recallable by voters and other judges expellable by Jury,. And have Jury of size 12 to 1500 to decide ALL cases.
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And why is Jury System still NOT there in India despite years of our campaign? Because we dont have many activists . And biggest reason why we have few activists is because workers of Congress / BJP / RSS / AAP / BST etc manage to convince the activists to join Congress / BJP / RSS / AAP / BST and do neta-puja and oppose RTR-law-drafts. But as time goes, hopefully, we will get more activists. And so chances that Jury System etc like laws will come in India will increase.

उन एनजीओ के बारे में जो भारत को बेहतर बनाने के लिए कार्य करते है लेकिन उनकी सूची में भारत को बचाने की कोई योजना नहीं है !!! (16-May-2016) No.1

May 16, 2016 No.1

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153487149441922

उन एनजीओ के बारे में जो भारत को बेहतर बनाने के लिए कार्य करते है लेकिन उनकी सूची में भारत को बचाने की कोई योजना नहीं है !!!
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मेरा ऐसे की एनजीओ से सामना हुआ है जो शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और दलितों, गरीबों, बच्चों आदि के लिए सेवा कार्य करते है। मैं उनके कार्यकर्ताओ का समर्थन करता हूँ पर उन कर मुक्त अनुदानों का विरोध करता हूँ जो वे सरकारों और संस्थाओं से प्राप्त करते है, और देखने में यह आया है कि इन्हे सरकारों द्वारा कर मुक्त अनुदान काफी प्रिय है और ये किसी भी कीमत पर इन अनुदानों को छोड़ना नहीं चाहते !!!
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खैर इसे जाने दीजिये। लेकिन मैं अक्सर उनसे दो प्रश्न पूछता हूँ --- (q1) ठीक है, आप भारत को बेहतर बनाने के लिए कार्य कर रहे है, लेकिन आप भारत को 'अमेरिका-ब्रिटेन' से बचाने के लिए क्या प्रयास कर रहे है ? (q2) भारत और अमेरिका-ब्रिटेन के बिच बिगड़ते शक्ति अनुपात को बेहतर बनाने के लिए उनके पास क्या योजना है ?
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क्योंकि मेरे विचार में यदि भारत और अमेरिका-ब्रिटेन के बीच शक्ति अनुपात इसी तरह से बिगड़ता रहा तो 1750 में हुए हादसे के फिर से दोहराव को रोका नहीं जा सकेगा।
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ये दो प्रश्न उन्हें चौंका सकते है।
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कई एनजीओ के कार्यकर्ताओ को लगता है कि भारत और अमेरिका-ब्रिटेन के बीच बिगड़ते शक्ति अनुपात के कोई मायने नहीं है !! उन्होंने अपने जीवन में इस बात पर कभी विचार नहीं किया कि अमेरिका-ब्रिटेन की ताकत लगातार बढ़ रही है। वे इस खुशफहमी में है कि अमेरिका-ब्रिटेन कभी भी भारत को टेक ओवर करने की कोशिश नहीं करेंगे चाहे भारत और अमेरिका-ब्रिटेन के बीच शक्ति अनुपात कितना ही क्यों न बिगड़ जाए। हद तो यह है कि उनका मानना है -- भारत पर्याप्त रूप से इतना सक्षम है कि यदि अमेरिका-ब्रिटेन भारत की दशा ईराक और लीबिया जैसी बनाने की कोशिश करता है तो भारत आसानी से निपट लगा !!!
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मेरा बिंदु यह है कि --- ऐसे सभी कार्यो की सूची जिसमे भारत को बेहतर बनाने के कार्यो को रखा गया है किन्तु भारत को अमेरिका-ब्रिटेन से 'बचाने' के कार्यो को सम्मिलित नहीं किया गया है, पूरी तरह से अनुपयोगी तो है ही, देश की उत्तरजीविता के लिए खतरनाक भी है। इसीलिए हमें उन कार्यों को भी तरजीह देनी पड़ेगी जिससे भारत और अमेरिका-ब्रिटेन के बीच बिगड़ते शक्ति अनुपात को गिरने से रोका जा सके।
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इस मामले में कम से कम संघ/बीजेपी के कार्यकर्ताओ मान्यता कुछ अलग सी है --- वे यह तो मानते है कि भारत अमेरिका-ब्रिटेन की सैन्य शक्ति के बढ़ते खतरे का सामना कर रहा है, लेकिन इसके निदान के लिए वे काफी रोचक तरीका सुझाते है। उनका कहना है कि --- मोदी साहेब और सिर्फ मोदी साहेब की पूजा भक्ति से ही इस समस्या से निपटा जा सकता है !! वे मोदी साहेब को सुपरमैन की तरह आंकते है, जो अमेरिका-ब्रिटेन की सेना को पलक झपकते ही निपटा देंगे !!! जब उन्हें कहा जाता है कि भय्या ऐसा नहीं होता, और हमें अपनी सेना को मजबूत बनाने के लिए अच्छे क़ानून ड्राफ्ट्स की आवश्यकता है तो वे प्रत्युत्तर में कहते है कि मोदी साहेब जल्दी ही अच्छे कानून लागू करेंगे। और वे अच्छे क़ानून ड्राफ्ट्स कौनसे है ? तो जवाब मिलता है कि -- खामोशी से देखते जाओ और मोदी साहेब की भक्ति करो !! इस तरह बीजेपी/संघ के कार्यकर्ता भी अल्टीमेटली कांग्रेस/आम पार्टी के कार्यकर्ताओ की लाइन ले लेते है !!! पर कुल मिलाकर इस विषय पर बीजेपी/संघ के कार्यकर्ता इस लिहाज से कांग्रेस/आम पार्टी से ज्यादा बेहतर स्थिति में है कि वे कम से कम भारत पर अमेरिका-ब्रिटेन बढ़ते खतरे को स्वीकार करते है।
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कुल मिलाकर ज्यादातर एनजीओ के एजेंडे में सिर्फ भारत को बेहतर बनाने की योजना है भारत को 'बचाने' की नही। और इन एनजीओ द्वारा प्रस्तावित उपाय इतने धीमे है कि इस दौरान अमेरिका-ब्रिटेन की ताकत लगातार बढ़ती जायेगी। इसीलिए हमारा आग्रह है कि कार्यकर्ताओ इन एनजीओ की गतिविधियों में अपना समय बर्बाद करने की जगह राईट टू रिकॉल पार्टी द्वारा प्रस्तावित राइट तू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, वेल्थ टैक्स, एमआरसीएम आदि कानूनों ड्राफ्ट्स को गैजेट में प्रकाशित करवाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
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Friday, May 13, 2016

Please go thru the law-draft in status below. And if you support that law-draft, then please see the FIRST comment in the status below (9-May-2016) No.1

May 9, 2016 No.1

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153475022041922

Please go thru the law-draft in status below. And if you support that law-draft, then please see the FIRST comment in the status below

PLD.0001.DigSignIndia
FileHash = 33ba408eaea83be2f0b5f3826aee575306e69ec5
BitTorHash = dfd73c3185c03af911427577702f6f9dad7727f1
.
====
.
Dear all voters, citizens, PIO of India,
.
This status post describes the proposed law-draft -- PLD.0001.DigSignIndia
.
If you support this law-draft, then please send the LINK to this status post to your MP via SMS (not via email, but SMS. Why? see FAQs in page description). And please also send following order to MP via SMS
,.
" Dear MP , I am ordering you to print the law-draft athttps://www.facebook.com/groups/ProposedLawDrafts/1695513953999268/ , FileSha1Hash = 33ba408eaea83be2f0b5f3826aee575306e69ec5 ,
BitTorrentHash = dfd73c3185c03af911427577702f6f9dad7727f1 in Gazette ".
.
And in another SMS, you may send link to THIS status post as well as magnet link to the above file. For magnet link, please see the notes in the description of this page"
.
And pls give newspaper advt, pls contest election on this issue, pls vote for candidate who supports this law. And pls like / share this status and pls take other steps mentioned in the second comment. And if you cant locate the second comment, then pls see description of this page which has link to index to all status in this page and first five comments of all statuses in this page.
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Now what difference will SMS from 45 crores voters of India to the MPs make? Where are ph# of MPs? All FAQs are answered in second comment. To get link, pls see description of this community
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( note --- this status is NOT edited after writing once, so that authenticity is preserved. For corrections to spelling etc errors, pls see the fifth comment . To locate fifth comment , pls see link to index note in the page's description. )
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Dear MP,
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If you got the link to this status via SMS , then it is an ORDER sent to you via your voter. The author of this status post has NOTHING to do with this order. The order is to print following law-draft in the Central Govt Gazette. Pls order PM to print this law-draft in the Central Govt Gazette.
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LawDraft = 0001.DigSignIndia
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LawDraftFileLink =https://www.facebook.com/groups/ProposedLawDrafts/1695513953999268/
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FileName = PLD.0001.DigSignIndia.txt
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FileSha1Hash = 33ba408eaea83be2f0b5f3826aee575306e69ec5
.
FileTextSha1Hash = 663ad96d23e1b0a83dcdc8b166c9031b80534132
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BitTorrentPieceLength = 16384 KB
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BitTorrentHash = dfd73c3185c03af911427577702f6f9dad7727f1
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======= start of the law-draft ====
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DigSignIndia : Law-draft for registration of hashes of Digital Signatures of voters of India
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[ This law-draft can come into effect after signature of PM ]
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1. [ instruction to DC = District Collector ] The President hereby orders DC that if any voter personally comes to DC's Clerk (designated by DC to maintain the voter list), and submits a serial number of 128 digits or less, then the Clerk will take that number, and enter that number in the voter list.
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2. [ instruction to voter ] The 140 digit number can be SHA1 hash or SHA2 hash of your Public Key, using which Digital Signature can be implemented. Or it can be any number. If you register the hash of your public key in the voter list, then any person across India, using the voter list, can verify that a given key is your public key. And thus, any person across India, can obtain your opinions from any website or torrent, and also ensure that that opinions are yours. The opinions can be opinions on a law-drafts or appointments / expulsions in administration / judiciary / polity or any other opinions.
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3. [ instruction to DC ] The number given by voter must follow following format - 3 digits, followed by a dot, followed by three digits, followed by dot and so forth. And the last character must be a dot. All characters must be 0-9 or dot. And the last 6 digits must be simple additive checksum of all previous digit-triplets. If number doesnt follow this format, then Clerk will not enter the number.
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4. [ instruction to DC ] DC will allow first registration for free. The citizen can later change the number. For the later changes, the DC will charge Rs 10 per change.
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5. [ instruction to DC ] DC will publish the number to public on the website of DC along with voter-id and the name of the voter. The number will not be put in the print version of the voter list.
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6. [ instruction to DC ] To reduce data entry cost, the DC will allow voter to bring the number in USB drive and / or a mobile phone and Clerk can transfer the file from the voter to Clerk's PC using USB or bluetooth.
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7. [ instruction to DC ] The Clerk will take picture as well as fingerprint of the voter. The voter must personally come to DC's designated office to register the number.
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===== end of law-draft ====
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How will this draft improve India? And to what extent? The author's opinions are stated in the third / forth comments.
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If you like this law-draft , then pls give newspaper advt to support this law-draft, pls contest elections to support this law-draft, pls share it on your wall, and pls send link to this law-draft to your MP via SMS, and take other steps mentioned in the first five comments.

[राईट टू रिकॉल - दूरदर्शन अध्यक्ष] (11-May-2016) No.2

May 11, 2016 No.2

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153477869566922

[राईट टू रिकॉल - दूरदर्शन अध्यक्ष]
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भारत के सभी नागरिकों,
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यह पोस्ट राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष क़ानून के लिए प्रस्तावित प्रक्रिया का विवरण प्रस्तुत करता है।
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यदि आप इस कानूनी ड्राफ्ट का समर्थन करते है तो अपने सांसद को एसएमएस द्वारा इस पोस्ट का लिंक भेजें। तथा इस कानूनी ड्राफ्ट की जानकारी देश के नागरिको तक पहुंचाने के लिए इसे लाइक करें, शेयर करें, समाचार पत्रो में विज्ञापन दें, इस मुद्दे पर चुनाव लड़ें तथा इस पोस्ट के पहले कमेंट में सुझायी गयी अन्य गतिविधियों में भाग लें। यदि आप इस पोस्ट के पहले तथा दूसरे कमेंट को नहीं देख पा रहे है तो, इस पेज के विवरण खंड (डिस्क्रिप्शन कॉलम) को देखें। वहाँ इस पेज के सभी पोस्ट्स तथा शेष पांच कमेंट्स के लिंक की सूची दी गयी है।
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यदि करोड़ो नागरिक अपने सांसदो को अपने मोबाईल फोन से एसएमएस भेजते है तो देश की वर्तमान व्यवस्था में क्या परिवर्तन आयेंगे ? इस प्रश्न तथा ऐसे ही अक्सर पूछे जाने वाले अन्य प्रश्नो के जवाब इस पोस्ट के दूसरे कमेंट में देखें जा सकते है। अन्य सम्बंधित जानकारी के लिए इस समुदाय का विवरण खंड देखें।
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टिप्पणी -- इस क़ानून ड्राफ्ट की विश्वसनीयता बनाएं रखने के लिए, इस पोस्ट को एक बार लिखे जाने के बाद संपादित नही किया गया है। वर्तनी या व्याकरण आदि की अशुद्धियों के सम्बन्ध में कृपया इस पोस्ट का छठा कमेंट देखें।
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सांसद को भेजे जाने वाले SMS का प्रारूप --
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"Hon MP, I order you to --https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/546885878822944, voter ID : ####"
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माननीय सांसद,
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यदि आपको इस पोस्ट का लिंक एसएमएस द्वारा प्राप्त होता है तो, ऐसा एसएमएस आपके लिए मतदाता द्वारा भेजा गया आदेश है। इस पोस्ट के लेखक का भेजे गए ऐसे आदेश या एसएमएस से कोई लेना देना नहीं है। आपको भेजा गया ऐसा आदेश इस कानूनी ड्राफ्ट को भारत के राजपत्र में प्रकाशित करने के लिए दिया गया है।
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(टिप्पणी -- इस कानूनी ड्राफ्ट के मूल अंग्रेजी संस्करण का लिंक इसी पोस्ट के दसवें कमेंट में दर्ज किया गया है।)
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राईट टू रिकॉल दूरदर्शन अध्यक्ष के लिए प्रस्तावित कानूनी ड्राफ्ट :
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======ड्राॅफ्ट का प्रारम्भ======
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1. नागरिक शब्द से आशय एक पंजीकृत मतदाता है।
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2. ( जिला कलेक्टर को निर्देश )
यदि कोई मतदाता दूरदर्शन अध्यक्ष बनाना चाहता है तो वह जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से शपथ पत्र के साथ स्वयं उपस्थित होगा। कलेक्टर या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति अर्जी स्वीकार करके जमा राशि लेगा और उसका नाम 'दूरदर्शन अध्यक्ष उम्मीदवार' के रूप में प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा। जमा राशि सांसद के चुनाव के लिए दी जाने वाली राशि के बराबर होगी।
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3. ( लेखपाल/पटवारी या तलाटी के क्लर्क को निर्देश )
यदि उस जिले का कोई नागरिक तलाटी के कार्यालय में आकर, 3 रूपया शुल्क देता है, और दूरदर्शन चैयरमेन के उम्मीदवारों में से अधिकतम 5 नामो के लिए अपना अनुमोदन दर्ज कराता है, तो तलाटी उस नागरिक की राय कंप्यूटर में दर्ज करके उस मतदाता को एक रसीद देगा, इस रसीद में नागरिक की वोटर आईडी, समय-तारीख और पसंद किये गए उम्मीदवारों के नाम होंगे। बाद में, इस सिस्टम में एस.एम.एस. भेजने का सिस्टम में डाला सकता है, जिससे एक बार राय देने का खर्च नागरिक को 10 पैसे देना होगा।
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4 (तलाटी को निर्देश )
तलाटी नागरिकों की राय जिले की वेबसाइट पर उनके मतदाता पहचान पत्र के साथ रखेगा।
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5 ( तलाटी को निर्देश )
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यदि नागरिक किसी स्वीकृति को रद्द करने आता है तो तलाटी बिना शुल्क लिए उसके अनुमोदन में से एक या अधिक नाम रद्द कर देगा।
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6 ( कैबिनेट सचिव को निर्देश )
हर महीने की 5 तारीख को कैबिनेट सचिव नागरिकों की राय प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर जारी करेगा। यह राय पिछले महीने की आखिरी तारीख तक की होगी।
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7 ( प्रधानमंत्री को निर्देश )
यदि किसी उम्मीदवार को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर सभी नागरिकों के 35% समर्थन मिलते है (सभी, न कि केवल जिन्होंने अपना अनुमोदन दिया है) और यदि ये अनुमोदन वर्तमान अध्यक्ष से 1% अधिक समर्थन है, तो प्रधानमंत्री चाहे तो वर्तमान दूरदर्शन अध्यक्ष को हटाकर, नागरिकों द्वारा अनुमोदित उम्मीदवार को दूरदर्शन अध्यक्ष बना सकते है, या प्रधानमंत्री को ऐसा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। प्रधानमंत्री का फैसला अंतिम होगा।
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8. जनता की आवाज
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8.1 ( जिला कलेक्टर को निर्देश )
यदि कोई नागरिक इस कानून या इसकी किसी धारा में बदलाव चाहता है तो वह 20 रुपये प्रति पृष्ठ की दर से एफिडेविट जिला कलेक्टर के सामने प्रस्तुत कर सकेगा। क्लर्क उस एफिडेविट को नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर स्कैन करके डाल देगा, ताकि सभी नागरिक बिना लॉग-इन के इसे देख सकें।
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8.2 ( पटवारी को निर्देश )
यदि कोई नागरिक इस क़ानून पर या इस क़ानून की किसी धारा पर अपना विरोध दर्ज करवाना चाहता है, या उपरोक्त धारा के अनुसार दर्ज एफिडेविट की किसी धारा पर अपनी हाँ या ना दर्ज करवाना चाहता है, तो वह तलाटी के ऑफिस में वोटर आईडी के साथ आएगा, 3 रूपया फीस देगा और अपनी हां ना दर्ज करवा सकेगा। तलाटी उसे एक रसीद देगा और नागरिक की हाँ/ना को प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर, नागरिक के वोटर आई.डी. नंबर के साथ रखेगा।
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======= ड्राफ्ट का अंत ======
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Question to ALL CAs (11-May-2016) No.1

May 11, 2016 No.1

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153478726361922

Question to ALL CAs
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NaMo has amended Mauritius treaty as follows
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Tax on Short Term Capital Gains before treaty modification 0%
Tax on Short Term Capital Gains now = 30% , same as others
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But a clause says --- Income tax on interest income earned by Mauritius based banks in India will be 7.5%
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So lets say a large foreign company-X has operations in India via company-X-India which earns say Rs 1000 crore. Business income can be converted into short term capital gains using ghapala. But now that window is closed.
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But say same company-X now opens bank-X and gives loans at VERY high interest rate to company-X-India. So high that all profit of company-X-India goes in interest payment. So bank-X earns profits, but all profit is via interest income. 
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So will tax rate on bank-X be only 7.5%?
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So will bank-X will have to pay 25% income tax, which is the normal tax rates for banks' profits?

Can a CA explain this "feature" of new amended Mauritius Tax Treaty --- Banks based in Mauritius loaning money in India will pay only 7.5% tax on interest earned. (12-May-2016) No.4

May 12, 2016 No.4

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153479816646922

Can a CA explain this "feature" of new amended Mauritius Tax Treaty --- Banks based in Mauritius loaning money in India will pay only 7.5% tax on interest earned.
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pls see website - http://www.thequint.com/…/no-india-mauritius-tax-treaty-won…
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It says
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3. Source-based taxation of interest income of banks: Interest arising in India to Mauritian resident banks will be subject to withholding tax in India at the rate of 7.5% in respect of debt claims or loans made after 31st March, 2017. However, interest income of Mauritian resident banks in respect of debt-claims existing on or before 31st March, 2017 shall be exempt from tax in India.
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So ;lets say a US company-X invests in India by forming subsidiary company-X-India and earns income. Then that income will be taxed at normal 25% rate --- same as Indian company. Equal equal --- no discrimination.
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But if that company-X first forms a bank-Y in Mauritius, and then bank-Y lends money to company-X-India , and charges such heavy interest that income of company-X-India becomes almost zero and bank-Y earns huge income via interest. Then will effective tax be ONLY 7.5%?
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If so, then tax rate has only changed from 0% to 7.5% instead of 25%. Is that so?
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Is so, then super-elitemen, who can form a bank in Mauritius, and also operate in India, will be taxed at 7.5%. Whereas others will be taxed normal rate of 25% to 30%.
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The amended treaty says that short term capital gains will be taxed at 30%. But with this new feature that interest earned by Mauritius banks will be taxed at only 7.5%, the effective tax rate on short term capital gains also becomes 7.5% only !!! How?
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Say Mauritius-bank-X = X and bank-Y belong to same owner.
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Say X buys shares of Indian company A and sells it and earns profit of say Rs 100 crore. So short term capital gains tax applies on bank-X. But say bank-X is also owning shares of some Indian company-B which it had bought for say Rs 200 crores. . Now Indian company B can take huge loans at heavy interest rate from bank-X . And so due to debt, shares of B will fall to RS 100 crore. So now bank-X can sell the shares to bank-Y, which belongs to same owner. And it will create short term capital loss of Rs 100 crore to bank-X. And so net capital gains is ZERO. And so net capital gains tax is also zero!!!/
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IOW, effective tax on USUK bank owners is only 7.5% and not 25% or 30% as NaMo is telling us.
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Can a CA answer this question?

Thursday, May 12, 2016

(1) महात्मा सुभाष बोस, त्रिलोकीनाथ चक्रवर्ती और सावरकर ने 1939-40 में ब्रिटिश राज के खिलाफ सैन्य विद्रोह में संघ से मदद मांगी थी। लेकिन डॉ हेडगेवार ने कोई रुचि नहीं दिखाई !! (12-May-2016) No.3

May 12, 2016 No.3

https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10153479879236922

(1) महात्मा सुभाष बोस, त्रिलोकीनाथ चक्रवर्ती और सावरकर ने 1939-40 में ब्रिटिश राज के खिलाफ सैन्य विद्रोह में संघ से मदद मांगी थी। लेकिन डॉ हेडगेवार ने कोई रुचि नहीं दिखाई !!

(2) श्यामा प्रसाद मुकर्जी बंगाल में हिन्दुओ का सशस्त्र संगठन खड़ा करना चाहते थे, लेकिन डॉ हेडगेवार ने मुकर्जी को समझाया कि हिन्दुओ के सशस्त्रीकरण की जगह उन्हें 'जगाने और संगठित' करने पर ध्यान देना चाहिए !! 

(3) दादा साहेब करिंदकर ने स्वयंसेवकों को तीर कमान सीखने को प्रोत्साहित करने के लिए अनुदान भेजा था। लेकिन डॉ हेडगेवार हिन्दुओ को धनुर्विद्या का प्रशिक्षण देने के खिलाफ थे !! 

(4) हिन्दू महासभा अध्यक्ष डॉ मुंजे हिन्दुओ के सैन्यकरण के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोल रहे थे। लेकिन डॉ हेडगेवार ने उन्हें 'अहिंसा परमो धर्म' का उपदेश देकर इस मॉडल को संघ में लागू करने से इंकार कर दिया !!

(5) जब महादुरात्मा गांधी ने 1934 में संघ के शिविर का दौरा किया तो वे डॉ हेडगेवार के कार्यकलापों से खुश थे, और उन्होंने संघ को सफलता की शुभकामनाएं दी। 

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(1)

"1939 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत के पास स्वतंत्र होने का सुनहरा मौका था। सावरकर जेल से रिहा होकर महासभा के अध्यक्ष बन चुके थे और हिन्दुओ के सैन्यकरण की योजना बना रहे थे। उन्होंने एक सशस्त्र हिन्दू सेना बनाने का फैसला किया। इसी समय सुभाष बाबू भी ब्रिटिश के खिलाफ बाहरी आक्रमण द्वारा विद्रोह की योजना बना रहे थे। इसमें कोई आष्चर्य नहीं था कि हेडगेवार जी की सांगठनिक क्षमता और समूह को देखते हुए दोनों ने ही अपनी योजना को सफल बनाने के लिए डॉ हेडगेवार से सहयोग लेने की जरुरत महसूस की। 

बालाजी हुद्दार और डॉक्टर वी आर संजगिरी सुभाष बाबू का सन्देश लेकर डॉ हेडगेवार के पास पहुंचे। उन्होंने डॉ हेडगेवार को सुभाष बाबू का सन्देश दिया। सुभाष बाबू की योजना थी कि ब्रिटिश के खिलाफ एक देशव्यापी विद्रोह किया जाए तथा उन देशो का भी बाहरी आक्रमण में सहयोग लिया जाए जो ब्रिटिश के खिलाफ है। 

डॉ हेडगेवार ने जवाब दिया कि, 'यह बात सही है कि देश में विद्रोह होने के हालात है। पर सबसे बड़ा सवाल है कि, आपकी तैयारी कितनी है ? इस योजना पर अमल शुरू करने के लिए हमें कम से कम 50% तैयारी की जरुरत है। इस समय सुभाष बाबू की कमांड में कितने लोग है ? जब तक हम खुद तैयार नहीं होते तब तक अन्य देशो से सहायता लेने से कोई लाभ नहीं होगा'। 

तय यह पाया था कि सुभाष बाबू स्वयं हेडगेवार जी मिलेंगे। कुछ दिनों बाद डॉ संजगिरी द्वारा हेडगेवार को बॉम्बे आने को कहा गया जहां सुभाष बाबू से उनकी मुलाकात होनी थी। किन्तु गिरे हुए स्वास्थ्य के चलते हेडगेवार बॉम्बे नहीं जा सके। साल भर बाद जब सुभाष बाबू डॉ हेडगेवार से मिलने नागपुर आये तो अगले दिन डॉ हेडगेवार का अवसान हो चुका था।

अनुशीलन समिती के उग्र नेता त्रिलोकीनाथ चक्रवर्ती भी ब्रिटिश राज के खिलाफ राष्ट्रव्यापी विद्रोह की तैयारी कर रहे थे। एक बार चक्रवर्ती खुद नागपुर आये और विद्रोह की योजना के बारे में डॉ हेडगेवार से मिले। लेकिन डॉ हेडगेवार का साफ़ तौर पर मानना था कि लोगो को जगाना और संगठन को मजबूत बनाये बिना सफलता सम्भव नहीं है और इसके लिए अभी और तैयारी करने की जरुरत थी"। 

(संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 76, Publisher : RSS, लिंक -- http://goo.gl/LA1RSC )

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(2) 

"श्यामा प्रसाद मुकर्जी सीधे बंगाल से आये थे, और उनके पास बंगाल में हिन्दुओ की दुर्दशा से सम्बंधित बुरी खबरे थी। हिन्दुओ की सम्पत्ति को लूटा गया था और उनकी स्त्रियों के साथ मुस्लिम आतताई ज्यादती कर रहे थे। हिन्दू विधवाओं की दशा और भी बदतर थी। मुकर्जी की आवाज में गहरी पीड़ा और गुस्सा भरा हुआ था। उनका कहना था कि बंगाल में हिन्दुओ के एक सशस्त्र दस्ते (मार्शल ग्रुप) को संगठित करने की तत्काल जरुरत है, वरना बंगाल में हिन्दू नहीं बचेंगे। मुकर्जी यह कह रहे थे तो उनकी आवाज भर्रायी हुयी थी। 
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यह सुनकर डॉ हेडगेवार गहराई से विचार करने लगे। तब उन्होंने कहा की, 'हमें नहीं भूलना चाहिए कि वहाँ एक मुस्लिम सरकार है। वे हिन्दूओ के सशस्त्र दस्ते को वहां टिकने नहीं देंगे। और ब्रिटिश भी उनका ही समर्थन कर रहे है। उनके लिए हिंदुत्व का उत्कर्ष एक बुरे सपने की तरह है। तब वे तुम्हारी योजना को कैसे सफल होने देंगे' ? यह सुनकर मुकर्जी ने कहा कि, फिर आपके हिसाब से हिन्दुओ कौनसा रास्ता बचा है ? 
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तब डॉ हेडगेवार ने अपनी गहरी सोच को प्रकट करते हुए बड़े ही सधे हुए अंदाज में कहा कि, 'बात चाहे पंजाब की हो या बंगाल की, हिन्दुओ की दुर्दशा का कारण है कि वे संगठित नहीं है। जब तक हिन्दू संगठित नहीं होते तब तक उनकी दशा ऐसी ही रहेगी। हमें सभी हिन्दुओ को राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत करना होगा। हमें उन्हें एक दूसरे से प्यार करना सिखाना होगा ताकि वे एक दूसरे से संयुक्त होकर पूरे देश को उठ खड़े होने में मदद करे। सिर्फ और सिर्फ इसी तरीके से हिन्दू एक राष्ट्र के रूप में फिर से उठ खड़े हो सकेंगे। और संघ बिलकुल इसी नीति पर काम कर रहा है'

डॉ मुकर्जी हेडगेवार जी के इन अद्भुत विचारों से बेहद प्रभावित हुए और जल्दी ही बंगाल में उन्होंने शाखा लगानी शुरू कर दी"। 

(संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 78, Publisher : RSS, लिंक -- http://goo.gl/LA1RSC ) 

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(3)

"सतारा के ख्यात न्यायविद दादा साहेब करिंदर की मृत्यु के बाद उनके पुत्र विट्ठलराव करिंदर ने डॉ हेडगेवार जी को 100 रूपये के साथ यह सन्देश भेजा था कि दादा साहेब की इच्छा थी कि इन रुपयों से एक शील्ड खरीदकर उस स्वयसेवक को इनाम के रूप में दी जाए जो तीरंदाजी में सबसे कुशल हो। डॉ साहेब ने जवाब भेजा कि, 'संघ में तीरंदाजी नहीं सिखायी जाती। हमने इसके प्रशिक्षण के बारे में विचार किया था लेकिन इसे लागू करना संभव नहीं हो सका। ऐसी स्थिति में आपकी राशि का इस्तेमाल अमुक मद में नहीं किया जा सकता। यह राशि यहां हमारे पास जमा रहेगी। आगे हम इसका उपयोग आपकी सलाह के अनुसार करेंगे'। 
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बाद में विट्ठल राव के निर्देशानुसार इस राशि का उपयोग सांगली में संघ कार्यालय के लिए भूमि खरीदने के लिए किया गया था"। 

(संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 66, Publisher : RSS, लिंक -- http://goo.gl/LA1RSC ) 

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(4) 

"युवाओं को मिलिट्री ट्रेनिंग देने के उद्देश्य से डॉ मुंजे ने एक सैनिक स्कूल स्थापित करने का फैसला किया। 1936 में बॉम्बे में इस कमिटी की बैठक हुई थी और डॉ हेडगेवार ने इसकी संयोजक कमिटी में भाग लिया था। बाद में डॉ हेडगेवार इसकी कार्यकारी संस्था के सदस्य भी रहे। डॉ हेडगेवार स्वयंसेवकों और देश के अन्य हिन्दु युवाओं को अहिंसा का महत्त्व बताने का मौका कभी नहीं चूकते थे।
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1936 में नागपुर में अपनी सार्वजनिक सभा में कहा था कि, 'हमें इस बात को दिमाग में अच्छी तरह से बिठा लेना चाहिए कि अहिंसा आत्महिंसा नहीं है। तथा 'अहिंसा परमो धर्म' हिन्दू धर्म की बुनियाद है। हमें यह पाठ अन्य समुदायो के लोगो को भी समझाना है। लेकिन वे हमारी बात तब ही सुनेंगे जब हिन्दू धर्म ताकतवर होगा। दुर्भाग्य से इस समय हम कमजोर है और कमजोर की बात नहीं सुनी जाती है। इसीलिए हमें पहले अपने आप को मजबूत बनाना होगा। और हमें यह याद रखना चाहिए कि यह मजबूती सिर्फ संगठन से ही आती है। प्रत्येक हिन्दू का यह कर्तव्य है कि उसे हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए प्रयास करना चाहिए। संघ इसी महान कार्य को कर रहा है"। 

(संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 66, Publisher : RSS, लिंक -- http://goo.gl/LA1RSC )

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(5)

"जब 1934 में महादुरात्मा गांधी ने संघ के एक शिविर का दौरा किया तो उन्होंने डॉ हेडगेवार से पूछा कि आप पहले संघ में थे, अत: ये काम तो आप कांग्रेस में रह कर भी कर सकते थे, फिर आपने कांग्रेस को क्यों छोड़ा ? डॉ हेडगेवार का कहना था कि कांग्रेस एक राजनैतिक संगठन है इसीलिए ऐसा करना वहाँ संभव नहीं था। जब गांधी को संघ की विचारधारा और सिद्धांतो की जानकारी हुयी तो वे काफी हर्षित हुए और उन्होंने संतोष व्यक्त किया"। 
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(संदर्भ : Dr Hedgewar : The Epoch Maker, A biography. page : 64, Publisher : RSS, लिंक -- http://goo.gl/LA1RSC ) 

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पांचो घटनाएं संघ द्वारा प्रकाशित डॉ हेडगेवार की अधिकृत बायोग्राफी से ली गयी है। पांचो घटनाओं का अवलोकन करने से पता चलता है कि डॉ हेडगेवार की रुचि हिन्दुओ को संगठित और सक्रीय करने में नहीं थी बल्कि उन्हें निष्क्रिय बनाकर असंगठित बनाए रखने की थी, ताकि ब्रिटिश राज की कृपा दृष्टी बनी रहे। कैसे ?

क्या सुभाष बाबू, त्रिलोकीनाथ, मुंजे और सावरकर हिन्दू नहीं थे ? जब ये सेनानी ब्रिटिश को भगाने के लिए संघ की मदद मांगने आये तो डॉ हेडगेवार ने इन्हे दार्शनिक उपदेश देकर भेज दिया। यदि हेडगेवार इनका सहयोग करते तो हिन्दू असंगठित कैसे हो जाते ? इससे तो हिन्दुओ की ताकत बढ़ती थी। 

लेकिन समस्या यह थी कि अव्वल तो डॉ हेडगेवार ब्रिटिश राज से किसी भी प्रकार का टकराव मोल नहीं लेना चाहते थे और दूसरे वे चाहते थे कि हिन्दू सिर्फ उनके यानि कि संघ के झंडे तले ही संगठित हो। 
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उन्होंने उन हिन्दू युवाओं को एकत्रित किया जो राजनैतिक रूप से सक्रीय थे और ब्रिटिश राज के खिलाफ आंदोलन में 'अपने अपने तरीके' से शामिल हो सकते थे। संघ ने इस युवा शक्ति को इकट्ठा किया और गीत गाने और व्यायाम करने जैसे अनुपयोगी कार्यो में लगा दिया। लेकिन इतना अवश्य ध्यान रखा कि भले ही स्वयसेवको को खाकी गणवेश पहनकर परेड कराई जाए और व्यायाम कराया जाए लेकिन उन्हें अस्त्र शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। इसीलिए ब्रिटिश राज के खिलाफ लड़ने से हतोत्साहित करने के लिए डॉ हेडगेवार ने उन्हें राजनीति से दूरी बनाये रखने का उपदेश दिया। 

महादुरात्मा गांधी और डॉ हेडगेवार की इस 'हिन्दुओ के निशस्त्रीकरण की नीति' का परिणाम यह हुआ कि विभाजन के दौरान 20 लाख हथियार विहीन हिन्दुओ को गले कटाने पड़े। जब मुकर्जी हेडगेवार से यह कह रहे थे कि हमें बंगाल में हिन्दुओ की सश्त्रीकरण की आवश्यकता है तो डॉ हेडगेवार को इसका हल दर्शन शास्त्र में नजर आया। बच्चा भी बता देगा कि किसी हथियार विहीन व्यक्ति को कोई भी हथियार बंद व्यक्ति आसानी से लूट लेगा। कोई भी औसत बुद्धि वाला व्यक्ति इस बात को आसानी से समझ सकता था कि यदि बंगाल का यही मंजर यदि कल पूरे देश में घटित हो गया तो हिन्दुओ की हालत क्या होगी। लेकिन डॉ साहेब सामान्य व्यक्ति नहीं थे। असल में वे आला दर्जे के दार्शनिक थे। या फिर दार्शनिक बनने में उन्हें सुविधा थी। 
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असल में अंग्रेजो को खतरा उन युवाओं से था जो क्रांतिकारियों की राह पर चलते हुए सशस्त्र विद्रोह करने के मंसूबे बना रहे थे। और इसीलिए वे चाहते थे कि युवा महादुरात्मा गांधी और हेडगेवार के आदर्शो का अनुसरण करे न कि महात्मा भगत सिंह और महात्मा सुभाष बाबू का। इस तरह डॉ हेडगेवार वायसराय का वही काम कर रहे थे जो महादुरात्मा गांधी कर रहे थे। सक्रीय युवाओं को इकट्ठा करो और उन्हें अराजनैतिक गतिविधियों में उलझा दो। और उन्हें प्रोत्साहित करने के लिए एक 'ऊँचे आदर्श' के दर्शन का इस्तेमाल करो। एक चरखे चलाकर भूखे रहने की प्रेरणा दे रहा था जबकि दूसरे के हिसाब से राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए ऊँची आवाज में गीत गाकर शंख बजाये जाने चाहिए। 
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इसीलिए संघ ने क्रांतिकारियों को 'अंध राष्ट्रवादी' और भटके हुए नौजवानों की संज्ञा दी। संघ युवाओं को समझा रहा था कि भगत सिंह जी, महात्मा आजाद और उधम सिंह जी 'भटक' गए है। 

तब डॉ हेडगेवार ने स्वयंसेवकों को दिए अपने एक व्याख्यान में कहा था कि भारत को आजाद कराने के लिए हमें कम से कम 4% स्वयं सेवको की आवश्यकता है !! तब भारत की जनसँख्या 40 करोड़ थी। इस हिसाब से उन्हें अंग्रेजो से लड़ने के लिए डेढ़ करोड़ स्वयसेवक चाहिए थे। जबकि सच्चाई यह है कि तब अंग्रेजो की संख्या सिर्फ 1 लाख थी। और यदि सिर्फ 4 लाख तीरंदाजों का दस्ता भी होता तो अंग्रेजो को जान बचाकर भागना पड़ता। 

1947 में स्वयसेवको की संख्या 8 लाख थी। यदि सभी लाठी लेकर मुकाबला करते तो वे 1 लाख बन्दुक धारी अंग्रेजो से निपट नहीं पाते। लेकिन धनुष का प्रयोग करने पर 4 तीरंदाज आसानी से 1 बन्दुक धारी को टक्कर दे सकते थे। तीर कमान बनाने की तकनीक तब भारत में प्रचलित थी और इसका प्रशिक्षण भी छोटी अवधि में पूरा हो जाता है। और इसीलिए डॉ साहेब ने संघ के स्वयं सेवको को तीरंदाजी का प्रशिक्षण देने से इंकार कर दिया। असल में उनकी रुचि सिर्फ अपने समूह की संख्या बढ़ाने में थी। 

हालांकि आज भी संघ के स्वयंसेवकों की संख्या 70 लाख से अधिक नहीं है। मतलब डॉ साहेब के फार्मूले के अनुसार 2016 तक भी भारत के आजाद होने का वक्त नहीं आया है। आज भारत की जनसंख्या के हिसाब से डॉ साहेब को 4 करोड़ स्वयसेवको की आवश्यकता होती। मतलब उनका विचार भारत को 2025 में आजाद करवाने का था !!!

युवाओं को अनुपयोगी कार्यो में खपाये रखने की संघ की नीति में आज भी जस की तस है। राष्ट्रवादी युवाओं को खींचकर उनसे पौने पांच साल तक 'भारत माता की जय', वन्दे मातरम, हिन्दू राष्ट्र, के नारे लगवाओ, उन्हें सुबह शाम बुलवाकर परेड करवाओ, साल में 4 बार उन्हें चिंतन शिविरों में बुलाकर उपदेश दो, छह महीने में 3 बार उन्हें गाजे बाजे के साथ पथ संचलन निकालने को कहो, और जब चुनाव आये तो उन्हें बीजेपी के खाते में वोट गिरवाने के काम पर लगा दो। इसमें एक विचलन यह आता है कि जब भारत में कहीं आंधी पानी आदि प्राकृतिक आपदाएं आती है तो स्वयसेवक उनमे अपनी सेवाएं देते है। 

यही सब संघ करता आया है, और आगे भी करता रहे। जब तक यह संघ का सहायक एजेंडा है कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन बात तब बिगड़ जाती है जब एक तरफ तो संघ इन गतिविधियों को ही अपना मुख्य एजेंडा बना लेता है और अपने स्वयसेवको को उन सभी कानूनों का विरोध करने के लिए भी कहता है जिससे देश की समस्याओं का समाधान किया जा सके। तो इस प्रकार संघ के स्वयसेवक पिछले 90 साल से इसी एजेंडे पर काम कर रहे है। वे 'हिन्दुओ को संगठित करने और जगाने' के लिए नारे लगाते है, रेलिया करते है और बीजेपी के लिए वोट इकट्ठे करते है। 

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में आपदा प्रबंधन भारत से हजारो गुना बेहतर स्थिति में है। और वहां संघ जैसा कोई समूह नहीं है। फिर वहाँ आपदा प्रबंधन कैसे होता है। क्योंकि वहाँ पर अच्छी क़ानून प्रक्रियाओं ने प्रशासन में सुधार लाकर उन्हें आपदा प्रबंधन में सक्षम बना दिया है। संघ पिछले 90 साल से आपदा प्रबंधन में सेवाएं दे रहा है - जो कि अच्छी बात है - लेकिन संघ उन सभी कानून प्रक्रियाओं का विरोध करता है जिससे भारत के प्रशासन में सुधार आये और हमारी आपदा प्रबंधन की क्षमता बढे। 
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भारत में प्राकृतिक आपदा से ज्यादा मौते गरीबी और भुखमरी से होती है, और हमारी व्यवस्था भ्रष्टाचार में कंठ तक डूबी हुयी है । लेकिन संघ ने आज तक गरीबी और भ्र्ष्टाचार मिटाने के लिए कभी कोई कानूनी ड्राफ्ट नहीं दिया। और साथ ही अपने सभी स्वयसेवको को यह भी निर्देश दिए कि गरीबी और भ्र्ष्टाचार के निवारण के लिए आवश्यक एमआरसीएम और राईट टू रिकॉल प्रक्रियाओं को विरोध करो। क्या भुखमरी से मरने वालो में हिन्दू शामिल नहीं है ? 

संघ हिन्दूओ संगठित करने और हिन्दू धर्म के उत्कर्ष की बात करता है लेकिन हिन्दु धर्म के कमजोर प्रशासन को बेहतर बनाने के लिए तमाम कानूनों का विरोध करता है। संघ में आज 70 लाख स्वयंसेवक है। क्या संघ में 7 करोड़ स्वयसेवक होने से हिन्दू धर्म का प्रशासन अपने आप बेहतर हो जाएगा, या गौ हत्या अपने आप रूक जायेगी ? नहीं होगा। इसके लिए हमें आवश्यक कानूनों को देश में लागू करना होगा। लेकिन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कानूनों की बात करने मात्र से ही संघियो के बदन पर चींटिया रेंगने लगती है। 
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कुल मिलाकर एक तरफ तो संघ लाखों कार्यकर्ताओ को अनुपयोगी कार्यो में खपाये रखता है और दूसरी तरफ अपने स्वयसेवको को उन सभी कानूनों का विरोध करने के लिए भी कहता है जिससे हिन्दू धर्म को मजबूत बनाया जा सके और देश की समस्याओं का समाधान हो। 

समाधान ?

हमारा आग्रह है कि यदि कार्यकर्ता हिन्दू धर्म को मजबूत और संगठित बनाना चाहते है तो उन्हें उन कानूनों की मांग करनी चाहिए जिनसे हिन्दू धर्म के प्रशासन को मजबूत बनाया जा सके और देश में व्याप्त अन्य समस्याओं जैसे गरीबी, भ्र्ष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी आदि का निवारण किया जा सके। इसके लिए हमारे द्वारा प्रस्तावित राईट टू रिकॉल, ज्यूरी सिस्टम, एमआरसीएम, वेल्थ टैक्स, टीसीपी, राष्ट्रिय हिन्दू देवालय ट्रस्ट आदि कानूनों के प्रस्तावित ड्राफ्ट निचे दिए गए लिंक पर देखे जा सकते है। 

यदि आप बेहतर देश चाहते है तो बेहतर क़ानून प्रक्रियाओं का समर्थन करे और अपने क्षेत्र के सांसद को एसएमएस द्वारा आदेश भेजे कि इन कानूनों क गैजेट में प्रकाशित किया जाए। और यदि आप संघ के स्वयसेवक है तो उनसे समस्याओं के समाधान के लिए कानूनी ड्राफ्ट मांगे। यदि वे क़ानून ड्राफ्ट देने से इंकार करते है तो देश हित में बेहतर होगा कि आप अपना समय और ऊर्जा संघ के साथ लगकर जाया न करे। क्योंकि संघ का एजेंडा हिन्दु धर्म और देश को नहीं बल्कि खुद को मजबूत बनाना है। 

प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट यहां देखे जा सकते है ---https://web.facebook.com/ProposedLawsHindi/posts/563544197157112

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