May 16, 2012
https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10150797585341922
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Translated into Hindi by Anil Shaw
भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताए भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, स्वामी जी और भारत को नष्ट कर देंगे
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जनवरी सन 2009 में भारत स्वाभिमान के अभिर्भाव के दिन से ही मै भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के कार्यकर्ताओ को निवेदन कर रहा हूँ कि भारत कि वर्तमान कानून और विश्व कि कानून को पढ़िए इसके साथ वर्तमान, प्राचीन या अन्य कार्यकरताओ के द्वारा दिए गए कानून को पढ़िए और इसे अन्य सदस्य , जिला या राज्य प्रभारी एवं स्वामी रामदेव जी तक पहुचाइएं | कुछ कार्यकर्ताओ ने इस पर अमल भी किया है | परन्तु अधिकतर कार्यकर्ताओ ने कानून पढ़ने से इनकार कर दिया है और जोर डाल रहे है कि हमें केवा; नारे बजी, सदस्यता अभियान और अन्य ऐसे कर्यो में लगे है जिससे देश को कोई लाभ नहीं होगा | जो सबसे अधिक महत्वपूर्ण कारण है जिसके लिए मैं उनलोगों को कानून और प्रस्तावित कानून पढ़ने को कहता हूँ वो यह है कि कोई व्यक्ति चाहे वो कितना महान क्यों न हो उसके पास केवल दिन में 24 घंटे ही होते है | और यदि स्वामी जी पास में रहने वाली व्यक्ति यदि अपना दिमाग नहीं प्रयोग करेंगे तो एक दिमाग 24 घंटे से अधिक अच कार्य नहीं कर सकता | और भारत के शत्रु जैसे बहुराष्ट्रीय कंपनिया (MNCs) और Missionaries जिनका कार्य कम केन्द्रीयकरण व्यस्था से चकता है वह आसानी से जाल बिछाकर हमें हरा सकती है |
भारत स्वाभिमान कि ऐसी गतिविधि के कारण, स्वामी जी धूर्त व्यक्ति जैसे अन्ना हजारे कि जाल में फंस गए और उन्हें मुस्लिम और ईसाई दलितो के आरक्षण कि बात करनी पड़ गयी | और इसके असली लाभभोगी Missionaries ही हिंगे कोई मुस्लिम नहीं | और यदि नया कानून बनता है तो एक भी मुस्लिम दलितो को इससे लाभ नहीं मिलेगा | अधिकतर Missionaries के जाल में फस जाएँगे | भारत कि जनसँख्या 121 करोड़ है और इनमे से 20 करोड़ हिंदू दलित, कुछ 20 करोड़ मुसलमान जिनमे से कुछ 10 करोड़ “मुस्लिम दलित” है | यदि आरक्षण को मुस्लिम दलितो के लिए बढ़ाया जाता है तो इससे मुस्लिम दलित 14% से 20% से 24% तक बढ़ जाएँगे | और यदि एक बार आरक्षण ईसाई-दलित को मिलने लगा तो 5 या 10 वर्ष के अंदर ही 70% से 80% Missionaries के जाल में फस जाएँगे | आज से लगभग 8 वर्ष पहले पूर्व पोप जब भारत आया था तो कहा था “हम चाहते है कि पूरा Asia ईसाई हो जाए” इसका अर्थ यही हुआ कि वे कह रहे थे “हम asia से हिंदुत्व और इस्लाम को खत्म कर देना कहते है” और यदि भारत में ईसाईओ को आरक्षण मिल गया तो इससे यह काम बोहोत जल्द हो जाएगा |
“मुस्लिम दलित” “ईसाई दलित” में आरक्षण कि मांग बिल्कुक गलत है क्योकि इससे और मुस्लिम में कोई दलित होता ही नहीं है | इन्हें पूर्व दलित कहना अधिक सही रहेगा जिसका मै प्रयोग करता हू | हिन्दुओ में दलितो को लेकर काफी पक्षपात होता है परन्तु जो ईसाई या मुसलमान में पूर्व दलित है उनमे पक्षपात नहीं होता |
अभी कोंग्रेस मुस्लिम पूर्व दलित और ईसाई पूर्व दलित के आरक्षण को लागु करने के लिए बोहोत प्रयास कर रही है और इसी तरह सोनिया, मनमोहन, दिग्विजय, नितीश कुमार, लालू यादव, करात, येचुरी, मुलायम यादव अन्य भी इसका प्रयास कर रहे है | आखिर Missionaries इन लोगो को हजारों करोडो रूपए का रिश्वत जो देती है ताकि ईसाई पूर्व दलितो को आरक्षण जो मिल जाए | इसके लिए तो वो स्वामी रामदेव जी को भी श्री देंगे !! क्यों नहीं ?? यही तो कोंग्रेस और CPM चाहती थी जब से वो मई-2004 से सत्ता में आई है, परन्तु मांग नहीं कर प् रही राष्ट्रवादीयो के भय से | परन्तु जब अभी राष्ट्रवादीयो ने कानून पढ़ने से मुह मोड लिया है और नए कानून से देश में क्या असर होगा इससे उनको कोई फर्क नहीं पड़ता तो यह कोंग्रेस के बहुत अच्छा अवसर है ऐसे कानूनों को पास करना |
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मै इस समस्या के लिए समाधान प्रस्तुत करता हूँ
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क्या इस नुक्सान कि भरपाई हो सकती है ? मेरे राय से हाँ , भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओ को कानून-ड्राफ्ट को और प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को पढ़ना शुरू कर देना होगा और निर्णय लेना होगा कि कौन सा प्रस्तावित कानून\ड्राफ्ट हमारे लिए अच है और उस प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को अपने अन्य कार्यकर्ताओ को, जिला या राज्य प्रभारी या स्वामी जी को पढ़ने के लिए कहे | या अखबार में प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट का विज्ञापन भी दे सकते है और प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को अपने घोषणा पत्र में डाल सकते है |
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क्या इस नुक्सान कि भरपाई हो सकती है ? मेरे राय से हाँ , भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओ को कानून-ड्राफ्ट को और प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को पढ़ना शुरू कर देना होगा और निर्णय लेना होगा कि कौन सा प्रस्तावित कानून\ड्राफ्ट हमारे लिए अच है और उस प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को अपने अन्य कार्यकर्ताओ को, जिला या राज्य प्रभारी या स्वामी जी को पढ़ने के लिए कहे | या अखबार में प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट का विज्ञापन भी दे सकते है और प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को अपने घोषणा पत्र में डाल सकते है |
अधिकतर कार्यकर्ताए मुझसे पूछते है कि मै स्वामी जी से क्यों नहीं मिलता ? इसके कई कारण है कि अहमदाबाद से बहार नहीं जा सकता | मार्च 2009 से में अधिकतर दिन मै अहमदाबाद से बहार रहा हूँ और फ़रवरी-मार्च 2000 में अमरीका में भिरह हूँ | और मै चुनाव का उम्मीदवार भी हूँ तो मेरे अपने कुछ सीमा बंधन है परन्तु यदि कोई उम्मीदवार नहीं है तो उसकी कोई सीमा बंधन नहीं है वह कही भी जाकर अपनी बात को रख सकता है |
तो अब यह भारत स्वाभिमान के कार्यकर्ताओ पर है कि वो क्या करे | आप निर्णय लीजिए कि आप मुस्लिम पूर्व दलित, ईसाई पूर्व दलित के आरक्षण को समर्थन करेंगे या नहीं | यदि आप समर्थन चाहते है तो ठीक है | परन्तु यदि आप देश के हित में कार्य करना चाहते है तो मै आपसे निवेदन करना चाहता हू कि कृपया प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट को पढ़ना शुरू कीजिये और अखबार में प्रस्तावित कानून-ड्राफ्ट का विज्ञापन भी दीजिए |
By Rahul Chimanbhai Mehta
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