मोदी साहेब द्वारा लागू किया गया जुवेनाइल क़ानून देश के साथ धोखा है ---- 16 वर्ष से अधिक उम्र के अपराधी को सिर्फ तब वयस्क माना जाएगा , जब जुवेनाइल बोर्ड उसे वयस्क माने , अन्यथा उसे नाबालिग ही माना जाएगा, और बलात्कार और हत्या जैसे जघन्य अपराध के बावजूद उसे ज्यादा से ज्यादा सिर्फ 3 वर्ष तक की सजा ही दी जा सकेगी।
.
मोदी साहेब और मोहन भागवत के समर्थक यह भ्रम फैला रहे है कि 'अब यदि कोई 16 वर्ष से अधिक आयु का किशोर बलात्कार या हत्या जैसा जघन्य अपराध करता है, तो नए क़ानून के अनुसार उसे व्यस्को की तरह 7 वर्ष की कैद या फांसी दी जा सकेगी'। ये सभी लोग फ्रॉड है और पूरे देश में झूठ फैला रहे है, क्योंकि नए क़ानून में ऐसा नहीं लिखा है।
.
नए क़ानून के अनुसार, मामला सबसे पहले जुवेनाइल बोर्ड के पास जाएगा। इस बोर्ड में एक सत्र न्यायधीश या मजिस्ट्रेट या सेवानिवृत न्यायधीश तथा दो अन्य सामाजिक कार्यकर्ता होंगे। सीधे शब्दों में बोर्ड में तीन सदस्यो का गठजोड़ होगा, जिनकी नियुक्ति 'अपना आदमी वाद' के आधार पर की जायेगी। यही तीन फ़रिश्ते यह तय करेंगे कि आरोपी के साथ वयस्क माना जाए या किशोर !! यदि ये तीन 'समझदार व्यक्ति' यह स्थापित कर देते है, कि आरोपी की मानसिक अवस्था किशोरोचित है , तब उसे किशोर ही माना जाएगा चाहे उसने बलात्कार और हत्या जैसा अपराध ही कारित क्यों न किया हो। यदि उसे किशोर मान लिया जाता है तो अनुसार उसे अधिकतम 3 वर्ष के लिए सुधारगृह में भेजा जा सकेगा।
.
दरअसल मोदी साहेब दबी जुबान में यह कह रहे है कि, "यदि आप किसी रईस या उच्च पदाधिकारी या राजनेता की किशोर संतान है या आपके परिजनों के लव जिहाद को बढ़ावा देने वाली सऊदी अरब की लॉबी से अच्छे संपर्क है, या भ्रष्ट जजो तक आपकी पहुँच है या पीड़ित लड़की जिस पर आपने बलात्कार किया है, गरीब तबके से है तथा पेड मिडिया अमुक मामले को कवरेज नहीं देता है , तो आप आसानी से जुवेनाइल बोर्ड के इन तीन सदस्यों के सामने पैसा फेंक कर, खुद को जुवेनाइल घोषित करवा सकते है" !!!
.
तब मोदी साहेब ने कहा था कि, '16 वर्ष से अधिक उम्र के किशोरों द्वारा यदि जघन्य अपराध किया जाता है, तो नया बिल उन्हें व्यस्को की तरह सजा देगा'। अत:ध्वनित कुछ यूँ हो रहा था कि जघन्य अपराध करने वाले किशोरों के साथ 'अनिवार्य तौर पर स्वत: ही' व्यस्को की तरह बर्ताव किया जाएगा।
.
क्या मोदी साहेब ने कभी यह कहा था कि, 'किशोर या वयस्क का फैसला जुवेनाइल बोर्ड करेगा' ??
.
"मोदी साहेब ने यह कभी नहीं कहा था कि, 'किशोर या वयस्क का फैसला' जुवेनाइल बोर्ड करेगा"
.
सीधे शब्दों में कहे तो यह चालाकी है, और मोदी साहेब ने पूरे देश के सामने यह झूठ बोला है।
.
प्रधानमन्त्री को इतने महत्त्वपूर्ण विषय पर झूठ बोलते देखना शर्मिंदा करने वाला है। कुल मिलाकर मोदी साहेब और मनमोहन सिंह जी में कोई अंतर नहीं है, चाहे मामला जुवेनाइल एक्ट का हो या एफडीआई का। मोहन भागवत और मोदी साहेब के अंध भगत भी लानत के पात्र है, जो मोदी साहेब के इस कुटिल व्यापार का समर्थन कर रहे है और देश में यह झूठ फैला रहे है कि 16 वर्ष से अधिक वयस के जघन्य अपराधी को वयस्क की तरह सजा दी जायेगी।
.
इस मुद्दे पर सोनिया और महात्मा अरविन्द गांधी भी मोदी साहेब से सहमत है, अत: वे भी 16 वर्ष से अधिक उम्र के जघन्य अपराधी को स्वत: ही बालिग़ की तरह सजा देने का विरोध कर रहे है। उनका भी यही कहना है कि, किशोर और वयस्क के निर्धारण का फैसला जुवेनाइल बोर्ड के विवेक पर छोड़ दिया जाना चाहिए।
.
समाधान ? --- कृपया सन्दर्भ विवरण के नीचे देंखे
.
============ सन्दर्भ विवरण प्रारम्भ ==============
.
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 -- कृपया 'जुवेनाइल जस्टिस बिल 2015 सर्च करे। बिल 25 दिसंबर 2015 को इस लिंक पर अपलोड किया गया ----
https://web.facebook.com/groups/righttorecallparty/files/….
सेक्शन - 14 (F) (ii) इस आयोग के लागू होने के दिन से,16 वर्ष से अधिक की आयु के किसी बालक द्वारा कारित किया गया दोषपूर्ण कृत्य पर निचे दिए गए सेक्शन 15 के अनुसार विचारणीय होगा।
.
सेक्शन 15
(1) उन परिस्थितियों में जबकि, कोई बालक जो किसी प्रकार के जघन्य अपराध को कारित किये जाने का आरोपी हो तथा अपराध के समय बालक की आयु 16 वर्ष या उससे अधिक हो, तो बोर्ड इस सम्बन्ध में प्राथमिक निर्धारण प्रक्रिया का संचालन करेगा कि, जिन परिस्थितियों के अंतर्गत अपराध कारित किया गया, उक्त आरोपी, किये गए अपराध के कारित किये जाने की मानसिक और शारीरिक क्षमता धारण करता है, किये गए कृत्य के संभावित परिणामो और प्रभावों को समझने की क्षमता रखता है, और बोर्ड इस अवलोकन के सम्बन्ध में सेक्शन 3 के सबसेक्शन (3) के तहत एक आदेश जारी कर सकेगा।
.
धारित किया जाता है कि ऐसे किसी निर्धारण के लिए बोर्ड किसी अनुभवी मनोचिकित्सक या सामाजिक मनोविज्ञानी या अन्य किसी विशेषज्ञ की सेवाएं ले सकेगा।
.
स्पष्टीकरण --- उक्त सेक्शन के उद्देश्य के लिए यह स्पष्ट किया जाता है कि, यह प्राथमिक निर्धारण प्रक्रिया सुनवाई नही है किन्तु यह ऐसे आरोपी बालक की उक्त अपराध को करने की क्षमता तथा कारित किये गए अपराध के प्रभावों को समझने की क्षमता का निर्धारण है जिस कृत्य को कारित करने का ऐसा बालक आरोपी है।
.
(2) यदि बोर्ड इस बिंदु पर संतुष्ट है कि प्राथमिक निर्धारण को निस्तारित किया जाना चाहिए तो बोर्ड निस्तारण की प्रक्रिया के लिए दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अंतर्गत सुनवाई के लिए समन जारी करने की प्रक्रिया का पालन कर सकेगा,
.
निर्धारित किया जाता है कि मामले के निस्तारण के सम्बन्ध में जारी किये गए बोर्ड के आदेश की अपील सेक्शन 101 के सबसेक्शन (2) के तहत की जा सकेगी।
.
यह भी निर्धारित किया जाता है कि इस सेक्शन के अंतर्गत बोर्ड द्वारा किये गए ऐसी प्राथमिक निर्धारण प्रक्रिया सेक्शन 14 में दी गयी अवधि के भीतर पूरी कर ली जानी चाहिए।
.
=========== सन्दर्भ समाप्त ========
.
अभीप्राय यह है कि, यदि बोर्ड यह तय करता है कि आरोपी नाबालिग है, तो सुनवाई नाबालिग के आधार पर ही की जायेगी। ऐसी स्थिति में आरोपी को अधिकतम कारावास 3 वर्ष से अधिक नही दिया जा सकेगा।
.
समाधान ?
.
कृपया अपने मित्रो और परिचितों को यह जानकारी दें कि, नए जुवेनाइल एक्ट के बारे में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जनता से झूठ बोल रहे है। उन्हें यह भी बताएं कि मोदी साहेब और भागवत के अंधभगत भी अपने इष्ट के प्रति निष्ठा साबित करने के चक्कर में उनका समर्थन कर रहे है।
.
कार्यकर्ताओ को देश में ज्यूरी प्रथा के कानूनी ड्राफ्ट को गैजेट में छपवाने के लिए कार्य करना चाहिए, ताकि नागरिको की जूरी यह फैसला करे की अपराधी को किशोर माना जाए या वयस्क। इससे मुकदमे की सुनवाई निष्पक्ष ढंग से की जा सकेगी और न्याय होगा।
.
इसके अलावा यह आवश्यक है कि सभी स्कूलों में सभी बच्चो के लिए 7 वर्ष की आयु से कानून की शिक्षा अनिवार्य की जाए, जिससे वे यह जान सके कि क्या करना अपराध है और क्या नहीं।
.
कृपया अपने सांसद को यह आदेश भेजे कि , 'प्रस्तावित ज्यूरी सिस्टम के कानूनी ड्राफ्ट को गैजेट में प्रकाशित किया जाए तथा किशोर अपराधो से सम्बंधित सभी विशेष कानूनो को रद्द किया जाए' ------
https://web.facebook.com/notes/pawan-kumar-jury/809761655808739