February 21, 2015
https://www.facebook.com/mehtarahulc/posts/10152611950326922
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राइट टू रिकॉल ग्रुप के कार्यकर्ताओं से मेरा आग्रह है कि हमें अपनी ओर से भू- अधिग्रहण कानून का ड्राफ्ट बनाकर प्रस्तावित करना चाहिए. और यह बताना चाहिए कि कैसे हमारे द्वारा प्रस्तावित भू- अधिग्रहण कानून का ड्राफ्ट सोमोके द्वारा दिए गये ड्राफ्ट से अच्छा है. हमें कुछ अन्य मुद्दों पर भी ड्राफ्ट प्रस्तावित करने चाहिए, जैसे- स्लम समस्या आदि पर. मैं सभी रिकौलिस्ट से अनुरोध करता हूँ कि वे ड्राफ्ट लिखना शुरू कर दें, बाद में हम उन्हें मिलाकर अपना प्रस्तावित ड्राफ्ट बनायेंगे.
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ध्यातव्य :
1. औद्योगीकरण के लिए भू- अधिग्रहण अनिवार्य है.
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2. भू- अधिग्रहण के अंतर्गत हम हाईवे और रेलवे के लिए की जाने वाली भूमि अधिग्रहण की बात नही कर रहे, इनके लिए कानून पहले से ही हैं और यह अधिग्रहण इतने छोटे पैमाने पर होता है कि शायद ही कभी यह किसी बड़े विवाद की वजह बनता है. इसके अंतर्गत हम एअरपोर्ट, ट्रेन स्टेशन आदि के लिए आवश्यक होने वाली भूमि को भी शामिल नही कर रहे, चूँकि इनकी संख्या बहुत कम होती है.
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3. भू- अधिग्रहण के अंतर्गत हम वृहत उद्द्योगों की स्थापना हेतु, अथवा डैम आदि के निर्माण हेतु किये जाने वाले भूमि- अधिग्रहण को शामिल करते हैं.
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4. बिना भूमि का अधिग्रहण किये औद्द्योगिक क्षेत्रों की स्थापना करना मुश्किल ही नही असंभव भी है. साथ ही यदि भू- अधिग्रहण का दुरूपयोग निरंकुश रूप से किया जाये तो इससे बड़े पैमाने पर किसानो को नुकसान होगा.
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वर्तमान समय में भारत में मात्र 2.65% भूमि का उपयोग (औद्योगिक+ खदान+ व्यावसायिक+ आवासीय+ सरकारी कार्यालय+ सैन्य परिसर+ सड़क+ रेलवे+ गोदाम आदि) के लिए हो रहा है. शेष 97.35% भूमि पर या तो कृषि- भूमि है या जलाशय, बंजर परती भूमि, वन आदि है.
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इस प्रकार आगामी 10 वर्षों में भारत की कुल भूमि का 1% उद्द्योगों में उपयोग होगा.
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कृषि में लगभग 50% भूमि का उपयोग होगा. अतः बिना कोई समस्या उत्पन्न किये 2% कृषि- भूमि को किस प्रकार अधिगृहित कर सकते हैं? इसके लिए हमें कानून ड्राफ्ट की आवश्यकता है.
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सोमोके ने इसके लिए अव्यावहारिक तरीके अपनाये हैं. सोनिया गाँधी तो मैदान छोड़कर भाग ही गयी. नमो ने इसके लिए एक अव्यावहारिक कानून दिया है जिससे भ्रष्ट/ भाई भतीजावादी जज क्षतिपूर्ति की रकम का निर्धारण करेंगे. अरविन्द केजरीवाल ने कोई वैकल्पिक ड्राफ्ट नही दिया है !! केजरीवाल का गेम बहुत सीधा है—यदि अमेरिका की कंपनी औद्योगिक उपक्रम की स्थापना कर रही है (जैसे- यूएस न्यूक्लियर पावर प्लांट कंपनी) तो उसका विरोध मत करो, और यदि कोई अन्य देश औद्योगिक उपक्रम की स्थापना कर रहा है तो उसका विरोध करो !!
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यदि हम एक बेहतर भू- अधिग्रहण ड्राफ्ट बना पाए तो संभव है कि हम सच्चे कार्यकर्ताओं को समझा सकें कि वे सोमोके कि अंधभक्ति को छोड़कर राइट टू रिकॉल के ड्राफ्ट का प्रचार करें.
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अतः कृपया एक ऐसा भू- अधिग्रहण ड्राफ्ट बनायें जिसमे आपकी नजर में अन्याय की संभावना अल्पतम हो.
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इसकी रूपरेखा कुछ इस प्रकार से हो सकती है—
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1. राज्य भू- अधिग्रहण अधिकारी एवं जिला भू- अधिग्रहण अधिकारी पर राइट टू रिकॉल लागू करना. राष्ट्रीय भू- अधिग्रहण अधिकारी पर इसकी आवश्यकता नही.
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2. इनके कर्मचारियों पर जूरी ट्रायल.
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3. जूरी क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ा/ घटा सकती है.
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4. भू- स्वामित्व के रिकॉर्ड सार्वजनिक किये जाएँ.
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5. सुनियोजित भू- अधिग्रहण के लिए संपत्ति कर अनिवार्य है.
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6. नगरों में बहुत सारी भूमि खाली पड़ी है. यदि इनका उपयोग किया जाये तो कम भूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ेगी.
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अतः कृपया उपर्युक्त तथ्यों को शामिल करते हुए कानून- ड्राफ्ट बनायें.
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इसी प्रकार हमें स्लम समस्या के समाधान हेतु कानून ड्राफ्ट बनाने की भी जरुरत है. वर्तमान समय में स्लम समस्या हमारे देश में एक ऐसी ज्वालामुखी बन चुका है जो कभी भी फट सकता है. स्लम के लिए ड्राफ्ट आसानी से बनेगा-- (1) भूमि की बिक्री के समय और बाद में फ्लैटों की बिक्री के समय नीलामी. (2) वेल्थ टैक्स - क्रेडिट (3) महानगरों के बाहर भारत की उन्नति के लिए RTR / Jury (4) DDMRCAM !!!
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DDMRCAM से स्लम समस्या कैसे कम होगी?
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सोमोके ने उन सभी कानून- ड्राफ्ट का विरोध किया है जिनसे स्लमों की संख्या में कमी लाई जा सकती है. इसलिए यह भी हमारे लिए एक प्रभावी मुद्दा हो सकता है जिसके आधार पर हम सच्चे कार्यकर्ताओं को इसके लिए सहमत कर सकते है कि वे सोमोके को छोड़ें और RTR-drafts को पारित करने के लिए उनका प्रचार करें.
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ध्यातव्य :
1. औद्योगीकरण के लिए भू- अधिग्रहण अनिवार्य है.
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2. भू- अधिग्रहण के अंतर्गत हम हाईवे और रेलवे के लिए की जाने वाली भूमि अधिग्रहण की बात नही कर रहे, इनके लिए कानून पहले से ही हैं और यह अधिग्रहण इतने छोटे पैमाने पर होता है कि शायद ही कभी यह किसी बड़े विवाद की वजह बनता है. इसके अंतर्गत हम एअरपोर्ट, ट्रेन स्टेशन आदि के लिए आवश्यक होने वाली भूमि को भी शामिल नही कर रहे, चूँकि इनकी संख्या बहुत कम होती है.
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3. भू- अधिग्रहण के अंतर्गत हम वृहत उद्द्योगों की स्थापना हेतु, अथवा डैम आदि के निर्माण हेतु किये जाने वाले भूमि- अधिग्रहण को शामिल करते हैं.
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4. बिना भूमि का अधिग्रहण किये औद्द्योगिक क्षेत्रों की स्थापना करना मुश्किल ही नही असंभव भी है. साथ ही यदि भू- अधिग्रहण का दुरूपयोग निरंकुश रूप से किया जाये तो इससे बड़े पैमाने पर किसानो को नुकसान होगा.
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वर्तमान समय में भारत में मात्र 2.65% भूमि का उपयोग (औद्योगिक+ खदान+ व्यावसायिक+ आवासीय+ सरकारी कार्यालय+ सैन्य परिसर+ सड़क+ रेलवे+ गोदाम आदि) के लिए हो रहा है. शेष 97.35% भूमि पर या तो कृषि- भूमि है या जलाशय, बंजर परती भूमि, वन आदि है.
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इस प्रकार आगामी 10 वर्षों में भारत की कुल भूमि का 1% उद्द्योगों में उपयोग होगा.
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कृषि में लगभग 50% भूमि का उपयोग होगा. अतः बिना कोई समस्या उत्पन्न किये 2% कृषि- भूमि को किस प्रकार अधिगृहित कर सकते हैं? इसके लिए हमें कानून ड्राफ्ट की आवश्यकता है.
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सोमोके ने इसके लिए अव्यावहारिक तरीके अपनाये हैं. सोनिया गाँधी तो मैदान छोड़कर भाग ही गयी. नमो ने इसके लिए एक अव्यावहारिक कानून दिया है जिससे भ्रष्ट/ भाई भतीजावादी जज क्षतिपूर्ति की रकम का निर्धारण करेंगे. अरविन्द केजरीवाल ने कोई वैकल्पिक ड्राफ्ट नही दिया है !! केजरीवाल का गेम बहुत सीधा है—यदि अमेरिका की कंपनी औद्योगिक उपक्रम की स्थापना कर रही है (जैसे- यूएस न्यूक्लियर पावर प्लांट कंपनी) तो उसका विरोध मत करो, और यदि कोई अन्य देश औद्योगिक उपक्रम की स्थापना कर रहा है तो उसका विरोध करो !!
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यदि हम एक बेहतर भू- अधिग्रहण ड्राफ्ट बना पाए तो संभव है कि हम सच्चे कार्यकर्ताओं को समझा सकें कि वे सोमोके कि अंधभक्ति को छोड़कर राइट टू रिकॉल के ड्राफ्ट का प्रचार करें.
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अतः कृपया एक ऐसा भू- अधिग्रहण ड्राफ्ट बनायें जिसमे आपकी नजर में अन्याय की संभावना अल्पतम हो.
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इसकी रूपरेखा कुछ इस प्रकार से हो सकती है—
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1. राज्य भू- अधिग्रहण अधिकारी एवं जिला भू- अधिग्रहण अधिकारी पर राइट टू रिकॉल लागू करना. राष्ट्रीय भू- अधिग्रहण अधिकारी पर इसकी आवश्यकता नही.
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2. इनके कर्मचारियों पर जूरी ट्रायल.
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3. जूरी क्षतिपूर्ति की राशि को बढ़ा/ घटा सकती है.
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4. भू- स्वामित्व के रिकॉर्ड सार्वजनिक किये जाएँ.
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5. सुनियोजित भू- अधिग्रहण के लिए संपत्ति कर अनिवार्य है.
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6. नगरों में बहुत सारी भूमि खाली पड़ी है. यदि इनका उपयोग किया जाये तो कम भूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता पड़ेगी.
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अतः कृपया उपर्युक्त तथ्यों को शामिल करते हुए कानून- ड्राफ्ट बनायें.
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इसी प्रकार हमें स्लम समस्या के समाधान हेतु कानून ड्राफ्ट बनाने की भी जरुरत है. वर्तमान समय में स्लम समस्या हमारे देश में एक ऐसी ज्वालामुखी बन चुका है जो कभी भी फट सकता है. स्लम के लिए ड्राफ्ट आसानी से बनेगा-- (1) भूमि की बिक्री के समय और बाद में फ्लैटों की बिक्री के समय नीलामी. (2) वेल्थ टैक्स - क्रेडिट (3) महानगरों के बाहर भारत की उन्नति के लिए RTR / Jury (4) DDMRCAM !!!
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DDMRCAM से स्लम समस्या कैसे कम होगी?
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सोमोके ने उन सभी कानून- ड्राफ्ट का विरोध किया है जिनसे स्लमों की संख्या में कमी लाई जा सकती है. इसलिए यह भी हमारे लिए एक प्रभावी मुद्दा हो सकता है जिसके आधार पर हम सच्चे कार्यकर्ताओं को इसके लिए सहमत कर सकते है कि वे सोमोके को छोड़ें और RTR-drafts को पारित करने के लिए उनका प्रचार करें.
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